
जबलपुर। नियम विरुद्ध तरीके से प्रदेश में संचालित नर्सिंग कॉलेज की तरह पैरामेडिकल कॉलेज संचालित किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में आवेदन पेश किया था। हाईकोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधरन तथा जस्टिस दिनेश कुमार पालीवाल ने पेश किये गये आवेदन की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में करने के आदेश जारी किये है। युगलपीठ ने कहा है कि अंतिम स्तर तक मुकम्मल जांच करवाते हुए दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जायेगी।
गौरतलब है कि लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की तरफ से साल 2022 में दायर याचिका में प्रदेश में फर्जी नर्सिंग कॉलेज संचालित किये जाने को चुनौती दी गयी थी। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट में नर्सिंग कॉलेज की सीबीआई जांच के आदेश जारी किये थे। सीबीआई की जांच प्रारंभिक जांच में 169 कॉलेज सूटेबल, 65 कॉलेज अनसूटेबल तथा 74 कॉलेज में कमियां पाई गई थी। सीबीआई की दूसरी जांच में 129 कॉलेज में कमियां पाई गई थी।
याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से आवेदन पेश किया गया था। जिसमें कहा गया था कि सीबीआई जांच की पहली जांच में एक कॉलेज सूटेबल पाया गया था। सीबीआई की दूसरी जांच में उक्त कॉलेज में कर्मिया पाई गई थी। इसी कॉलेज के बिल्डिंग में पैरामेडिकल कॉलेज संचालित किया जा रहा है। इतना ही नहीं मध्य प्रदेश पैरामेडिकल काउंसिल ने कॉलेजों को साल 2022-23 तथा 2023-24 के दाखिले की अनुमति कॉलेजों को प्रदान कर दी है। नियम अनुसार इन्हें जीरो ईयर घोषित किया जाना चाहिये था। ऐसे कौन से छात्र होंगे जो दाखिला पाने के लिए दो साल से इंतजार कर रहा होगा।
युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पैरा मेडिकल काउंसिल के चेयरमैन के संबंध में जानकारी चाही गयी। युगलपीठ को बताया गया कि प्रदेश सरकार के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला वर्तमान में चेयरमैन है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश जारी किये। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक बागरेचा ने पैरवी की।
