सतना :सतना वनमण्डल के चित्रकूट उप वनमण्डल अंतर्गत मझगवां वन परिक्षेत्र में रविवार की सुबह हुए दर्दनाक हादसे में 8 महीने की मादा बाघ शावक की मौत हो गई. मादा शावक अपने परिवार के साथ रेलवे ट्रैक पार कर रही थी. गनीमत रही कि मादा शावक के साथ चल रही बाघिन और दो अन्य शावक ट्रेन की चपेट में आने से बच गए.
प्राप्त जानकारी के अनुसार मझगवां वन परिक्षेत्र की चितहरा बीट के अंतर्गत हजारा पुल के निकट एक बाघिन अपने 3 शावकों के साथ रेलवे ट्रैक पार कर रही थी.
सुबह के लगभग 7 बजे दानापुर-पुणे सुफा एक्सप्रेस हावड़ा-मुंबई रेल मार्ग के अप ट्रैक से होकर गुजर रही थी. इसी दौरान एक शावक ट्रेन की चपेट में आ गया. ट्रेन के इंजन की जबरदस्त टक्कर लगने के कारण शावक अचेत होकर ट्रक के बगल में गिर गया. वहीं इस घटना के चलते बाल बाल बची बाघिन और दो शावक वहां से भाग निकले. घटना की सूचना लोको पायलट द्वारा चितहरा रेलवे स्टेशन प्रबंधक को दे दी गई.
जिसके चलते स्टेशन प्रबंधक द्वारा घटना के बारे में वन विभाग को सूचित किया गया. घटना की सूचना मिलने पर मझगवां वन परिक्षेत्र में पदास्थ रेंजर रंजन सिंह परिहार और पंकज दुबे वन अमले के साथ मौके पर पहुंचे. जांच करने पर शावक की सांसें चल रहीं थी. लिहाजा उसे आनन-फानन में उपचार के लिए मझगवां स्थित पशु चिकित्सालय ले जाया गया. जहां पर प्राथमिक उपचार कराने के बाद डीएफओ सतना मयंक चांदीवाल के निर्देश पर घायल मादा शावक को उपचार के लिए मुुकुंदपुर सफारी व जू सेंटर ले जाया गया.
मुकुंदपुर जू सेंटर के चिकित्सक डॉ. नितिन गुप्ता द्वारा घायल शावक का उपचार शुरु किया गया. हलांकि प्रारंभिक जांच में शावक की पूंछ के आस पास चोट नजर आ रही थी. लेकिन जब एक्सरे कराया गया तो शावक के सिर में भी गंभीर चोट आने की जानकारी हुई. सिर पर गंभीर चोट के चलते शावक कोमा में चली गई थी. जिसे देखते हुए रीवा के पशु चिकित्सकों की टीम को भी मुकुंदपुर जू सेंटर बुलाया गया. लेकिन लगातार जारी उपचार के बावजूद भी शाम होते-होते शावक ने दम तोड़ दिया. जिसे देखते हुए शावक के शव का पोस्टमार्टम डॉ. नितिन गुप्ता और डॉ. आदिति दीक्षित किया गया. पोस्टमार्टम के बाद मुख्य वन संरक्षक रीवा राजेश राय की मौजूदगी में शावक का अंतिम संस्कार कर दिया गया.
