प्रदेश प्रधानी : नरोत्तम, अरविंद और लालसिंह की पूरी नहीं हुई आस

ग्वालियर चंबल की डायरी
हरीश दुबे
मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष पद के लिए चंबल अंचल से तीन कद्दावर नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा, अरविंद भदौरिया एवं लालसिंह आर्य भी स्पर्धा में थे। राष्ट्रीय और प्रदेश की राजनीति में इनके पैरोकार रहे नेताओं ने खूब जोर भी लगाया लेकिन पार्टी ने चंबल के नेताओं के बजाए कुशाभाऊ ठाकरे ट्रस्ट के अध्यक्ष बैतूल के हेमंत खंडेलवाल की नेतृत्व क्षमताओं पर यकीन करना ज्यादा ठीक समझा। चंबल से दावेदारी कर रहे नरोत्तम, अरविंद और लालसिंह तीनों ही 2023 के हारे हुए विधायक हैं और ये तीनों ही तत्कालीन शिवराज सरकार में कई कई बार वजनदार महकमों के मंत्री रह चुके हैं।

बहरहाल, लालसिंह इस वक्त भाजपा अजा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं लेकिन नरोत्तम और अरविंद भदौरिया को अपने राजनीतिक पुनर्वास का इंतजार है। ऑपरेशन लोटस के जरिए कमलनाथ सरकार को गिराकर शिवराज सिंह को फिर से सीएम की कुर्सी तक पहुंचाने में नरोत्तम और अरविंद, दोनों ही पूर्व मंत्रियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी, जिसका पारितोष उन्हें मंत्रिमण्डल में वजनदार महकमे सौंपकर दिया गया था लेकिन 23 का चुनाव उनके लिए राजनीतिक दु;स्वप्न साबित हुआ।

मंत्री के अलावा प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और 23 के चुनाव में अन्य दलों के कद्दावर नेताओं को भाजपा में लाने का अभियान संभाल चुके नरोत्तम का नाम विगत दो बार से राज्यसभा की उम्मीदवारी के लिए भी चलता रहा लेकिन हर बार कोई न कोई ऐसा समीकरण बन जाता है कि नरोत्तम का नाम कट जाता है। इस बार भी ऐसा ही हुआ। दो दिन पहले तक प्रदेश अध्यक्ष पद के दावेदारों के क्रम में उनका नाम शीर्ष पर चल रहा था, अग्रिम बधाईयां प्राप्त होना भी शुरू हो गई थी लेकिन उनके साथ फिर राज्यसभा चुनाव वाली कहानी दोहराई गई। वे गृह मंत्री अमित शाह की गुडबुक में हैं।

शाह एक मर्तबा उनके भोपाल बंगले पर भी आ चुके हैं, पीतांबरा नगरी के दादा पूरी प्रतिबद्धता के साथ संघम गच्छामि भी हैं तो आखिर ऐसा कौन सा मापदंड है, जिसे नरोत्तम पूरा नहीं कर पा रहे हैं! प्रदेश की राजनीति के विश्लेषक इसी सवाल का जवाब तलाशने में जुटे हैं। वैसे मप्र भाजपा का अध्यक्ष पद ग्वालियर चंबल के खाते में जाता रहा है, नरेंद्र सिंह तोमर कई बार अध्यक्ष रहे तो ग्वालियर के ही स्व. प्रभात झा को भी यह सौभाग्य मिल चुका है। निवर्तमान अध्यक्ष वीडी शर्मा भी ग्वालियर मुरैना के ही बाशिंदे हैं। बहरहाल, ग्वालियर के खाते में एक बार फिर से प्रधानी आने का कुछ नेताओं को ख्वाब पूरा नहीं हो सका लेकिन ग्वालियर भाजपा का नेतृत्व हेमंत खंडेलवाल की ताजपोशी से खुश है, जिस गर्मजोशी से जश्न मना, उससे यह जाहिर भी होता है।

खत महापौर को, निशाना कहीं और

महान ओलंपियन कै. रूपसिंह के नाम पर बने ग्वालियर के अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम को लेकर भाजपा में रार और तकरार शुरूहो गई है। सांसद, महापौर और जीडीए के चेयरमैन रह चुके विवेक शेजवलकर इस स्टेडियम को एक बार फिर जीडीसीए को लीज पर दिए जाने से नाराज हैं। उनका कहना है कि जीडीसीए ने जब करोड़ों की लागत से शहर के बाहर शंकरपुर में अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम बना लिया है और वहां अंतर्राष्ट्रीय मैच और एमपीएल हो भी चुके हैं तो फिर जीडीसीए को नगर निगम के स्वामित्व वाला यह पुराना स्टेडियम लीज पर क्यों दिया जा रहा है! ग्वालियर में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच कराने वाली संस्था जीडीसीए सीधे तौर पर महल से निर्देशित होती है। शेजवलकर ने नाराजगी भरा खत तो मेयर को लिखा है लेकिन निशाना किस तरफ है, जानकार समझ गए।

इस विध्वंस का वास्तविक खलनायक कौन ?

अमूमन सत्ताधारी दल के नेता काफी सोच समझ कर जुबान खोलते हैं। संसदीय प्रणाली की पहली सीढ़ी पार्षद के समक्ष तो विधायक, सांसद और मंत्री बनने के सपने होते हैं और वह इनके साकार होने में रूकावट नहीं चाहता लेकिन ग्वालियर में हालिया बरसात से हुए जलप्लावन, घरों में पानी भरने और सड़कों के धंसने पर सत्तारूढ़ दल की पार्षद अर्पणा पाटिल ने सोशल मीडिया पर लंबा चौड़ा लेख लिखकर जो सवाल पूछे हैं, उनसे हलचल है। सत्ताधारी दल की इन पार्षद महोदया के मुताबिक उन्होंने दुनिया भर का भ्रमण किया है, देश के तमाम शहरों में गईं हैं, ग्वालियर में जो मौजूदा हालात बने हैं वह निराशाजनक हैं। अपनी मानसिक पीढ़ा को उजागर करते हुए उन्होंने सवाल किया है “ग्वालियर में हो रहे इस विध्वंस का वास्तविक खलनायक कौन है?”

सतीश ने प्रदेश प्रभारी को दिखाई ताकत

अम्बेडकर प्रतिमा के समर्थन में कांग्रेस के उपवास कार्यक्रम में शरीक होने आए प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी को विधायक सतीश सिकरवार ने अपनी ताकत दिखा दी। सतीश ने उपवास कार्यक्रम में भीड़ तो जोड़ी ही, दूसरे रोज चौधरी के सम्मान में अपने जनसंपर्क कार्यालय पर दोपहर भोज के साथ बड़ी बैठक भी रख दी। इसी बीच आपातकाल की मौजूदा वक्त में जरूरत बताने का विधायक महोदय का एक बयान भी सोशल साइट्स पर वायरल होता रहा।

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