
इंदौर।एमजीएम मेडिकल कॉलेज और एमवाय अस्पताल में इंटर्नशिप कर रहे 2020 बैच के करीब 250 मेडिकल विद्यार्थियों ने फैकल्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें न केवल शोषण का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि उन्हें निजी अस्पतालों में मरीज भेजने का भी दबाव झेलना पड़ रहा है।एमजीएम मेडिकल कॉलेज के इंटर्न डॉक्टरों ने डीन को शिकायत पत्र सौंपते हुए आरोप लगाया है कि एमवाय अस्पताल के कुछ फैकल्टी सदस्य उनसे मरीजों को निजी या अन्य सरकारी अस्पतालों में रेफर करने का दबाव डालते हैं। उनका कहना है कि यह कदम न केवल अनैतिक है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की नींव को कमजोर करता है।
इसके अलावा इंटर्न्स ने तीन महीनों से स्टाइपेंड न मिलने की भी शिकायत की है। कई छात्रों ने बताया कि वे स्टाइपेंड पर ही अपनी बुनियादी जरूरतों और शिक्षा संबंधी खर्चों को पूरा करते हैं, लेकिन बार-बार मौखिक शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि सर्जरी, मेडिसिन और आर्थोपैडिक्स जैसे विभागों में उन्हें अत्यधिक कार्यभार झेलना पड़ रहा है। “हमें 12 से 14 घंटे की नाइट ड्यूटी दी जाती है, जो राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा तय मानकों से अधिक है,एक इंटर्न ने बताया। लगातार लंबे समय तक ड्यूटी करने से न केवल उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि उनकी पढ़ाई पर भी असर पड़ रहा है।
इंटर्न्स ने मांग की है कि कॉलेज प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द ठोस कार्रवाई करे, ताकि उन्हें एक स्वस्थ और अनुकूल शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
