मां बगलामुखी मंदिर में बारिश में हो रहे हवन: भीगती आस्था, छाते के तले पूजा

नलखेड़ा। वर्षा की फुहारें जब भक्तिभाव में बाधा बन जाएं, तब समझिए कि व्यवस्था कहीं न कहीं पिछड़ गई है. नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी शक्तिपीठ में इन दिनों गुप्त नवरात्रि का पर्व चल रहा है, साधना के पवित्र अवसर पर जब हजारों श्रद्धालु देश के कोने कोने से मां के दरबार में हवन, पूजन और साधना के लिए पहुंचते हैं. लेकिन बुधवार की सुबह जब श्रद्धालु पूजा की तैयारी में लगे थे तभी अचानक शुरू हुई तेज बारिश ने श्रद्धा की उस आग को पानी में भिगो दिया.

मंदिर परिसर में दर्शनार्थियों के आने पर मंदिर परिसर के पास खुले आसमान के नीचे एक अस्थायी हवन कुंडों का निर्माण पंडितों के कहने पर मंदिर समिति के द्वारा करवाया गया था, लेकिन वहां पर वर्तमान में टेंट या शेड की कोई व्यवस्था नहीं है. जहां खुले आसमान के नीचे बने हवन कुंडों पर श्रद्धालु हाथ जोडक़र बैठे थे. किसी के सिर पर छाता था कोई प्लास्टिक की चादर ओढ़े मंत्रों का उच्चारण कर रहा था. बारिश की बूंदें हवन अग्नि को बुझाने की कोशिश करती रहीं और श्रद्धालु उसे बचाने में लगे रहे. गीली लकडिय़ां, फिसलती भूमि और जलभराव के बीच श्रद्धा अडिग थी, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही कहीं न कहीं साफ झलक रही थी.

पैसे लिए, पर सुविधा नहीं दी, श्रद्धालुओं का सवाल

हर हवन कुंड के लिए 350 रुपये शुल्क लेकर रसीद दी जाती है, लेकिन जब बारिश में हवन कुंड डूबने लगे तो ना कोई कर्मचारी नजर आया ना कोई तंबू या कवर की व्यवस्था. जबलपुर से आई श्रद्धालु ने कहा मां के दरबार में सिर झुकाने आए हैं लेकिन सुविधा शून्य है. हमसे पैसे तो लिए गए पर हमें छांव तक नसीब नहीं हुई. श्रद्धालुओं का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है. हर साल बारिश होती है हर साल भीगते हैं लेकिन मंदिर ट्रस्ट सिर्फ दान राशि लेने तक सीमित रह गया है.

महिलाओं और बच्चों की भारी परेशानी

तेज बारिश में महिलाएं साड़ी थामें बच्चे गोद में उठा श्रद्धा के साथ डटे रहे. यह मां का दरबार है कोई सरकारी दफ्तर नहीं कि शिकायतें सालों लटकी रहें, यह कहकर एक वृद्ध श्रद्धालु की आंखों में क्रोध और भक्ति दोनों झलक रहे थे. नलखेड़ा का मां बगलामुखी मंदिर एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है. यहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं, लेकिन व्यवस्थाओं का हाल यह है कि लोग छतरियों के नीचे हवन करने को मजबूर हैं. हवन अग्नि को बचाने के लिए श्रद्धालु खुद की व्यवस्था करते हैं, जबकि शुल्क लेकर भी प्रशासन मूकदर्शक बना रहता है.

इनका कहना है

मां बगलामुखी मंदिर पर आज से शेड मे बने हवन कुंड मे ही हवन करवाए जाएंगे.

सर्वेश यादव, अध्यक्ष प्रबंधन समिति मां बगलामुखी मंदिर

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