
उज्जैन। श्रावण व भादो मास में इस बार भगवान महाकाल चांदी की नई पालकी में निकलेंगे। पुरानी पालकी अनफिट होने के बाद समिति ने निर्णय लिया है कि पिछले साल भिलाई के भक्त ने गुप्त दान में जो पालकी दी थी उस नई पालकी में बाबा को निकाला जाए। मंदिर में श्रावण मास की तैयारियां शुरू हो गई है। 11 जुलाई से श्रावण लगेगा। 14 जुलाई को पहली सवारी आएगी। पिछले साल ही पुरानी चांदी की पालकी को पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने अनफिट घोषित कर दिया था। इसके बाद समिति ने नवंबर 2024 में गुप्त दान में आई नई पालकी के उपयोग का निर्णय ले लिया था। बाबा महाकाल के लिए नई पालकी का निर्माण उज्जैन में ही किया गया था जो कि 100 दिनों में तैयार हुई थी। इसमें सागौन की लकड़ी, स्टील के पाइप के साथ ही चांदी का उपयोग किया गया है। पालकी पर करीब 20 किलो 600 ग्राम चांदी का लगी है। इसका वजन लगभग 100 किलो है। लंबाई 17 फीट के करीब और चौड़ाई तीन फीट। पालकी को उठाने वाले हत्थे पर सिंह मुख की आकृति बनी है। चांदी पर सूर्य, स्वास्तिक, कमल पुष्प और दो शेरों की नक्काशी है। इस बार श्रावण व भादो मास में कुल छह सवारियां निकलेंगी। इसके चलते 6 बार मंदिर से बाबा महाकाल की चांदी की पालकी को उपयोग के लिए निकाला जाएगा। पहली सवारी 14 जुलाई को, दूसरी 21 जुलाई को, तीसरी 28 जुलाई को, चौथी 4 अगस्त को, पांचवीं 11 अगस्त को और छठी व अंतिम राजसी सवारी 18 अगस्त को निकाली जाएगी।
