सेवा समाप्ति के बाद नहीं गए कोर्ट, फिर भी हो रहा वेतन भुगतान

जबलपुर: स्मार्ट सिटी सीईओ व प्रबंधन से वहीं के 7 संविदा कर्मचारी अब जानलेवा कदम उठाने मजबूर हो चुके हैं। पीड़ित कर्मचारियों ने कहा है कि उनकी शिकायत पर अब अगर कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर ने ध्यान नहीं दिया तो अब वे आगे किसी भी प्रकार का कदम उठाने स्वतंत्र होंगे जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्मार्ट सिटी प्रबंधन, जिला प्रशासन व नगर निगम प्रशासन की होगी।

स्मार्ट सिटी के विभागीय कर्मचारियों द्वारा की गई शिकायत में चार ऐसे कर्मचारियों का नाम उजागर किया गया है, जिन्हें नियम-विरुद्ध तरीके से भुगतान किया जा रहा है। इसमें कंपनी सेक्रेटरी कैलाश भाटी, कार्यालय सहायक जितेंद्र विदेही, ऑफिस मैनेजर सौरभ दीक्षित और केएल कावरे शामिल हैं। कर्मचारियेां का कहना है कि जब ये चार कर्मचारी कोर्ट गए ही नहीं तो फिर इन्हें वेतन भुगतान क्यों किया जा रहा है।
कोर्ट से स्टे के बाद भी नहीं मिला न्याय
कलेक्टर को की गई शिकायत के अनुसार स्मार्ट सिटी कार्यालय में कार्यरत 23 संविदा कर्मचारियों में से 11 कर्मचारियों के लिए 8 अप्रैल 2025 को आदेश जारी किया गया कि 1 अप्रैल 2023 से उनकी सेवाएं समाप्त की जाती हैं। फिर स्मार्ट सिटी के सीईओ के खिलाफ 11 में से 7 कर्मचारी माननीय उच्च न्यायालय की शरण में गये और कोर्ट ने संविदा समाप्ति आदेश पर स्टे दे दिया। इसके बाद स्मार्ट सिटी प्रबंधन द्वारा 4 कर्मचारियों को वेतन भुगतान कर दिया जो कोर्ट के दरवाजे गए भी नहीं। मतलब साफ था कोर्ट के स्टे के बाद भी स्मार्ट सिटी प्रबंधन ने न्यायालय के आदेश का उल्लंघन किया। जानकारी के अनुसार कोर्ट से स्टे पाने वाले सात कर्मचारियों में अभिलाष पांडे, विक्रांत सक्सेना, योगेश भालेराव, अश्विनी मिश्रा, अजय गुप्ता, राहुल कुशवाहा एवं अब्दुल खालिक खान शामिल हैं।
इनका कहना है
कर्मचारियों द्वारा अनाप-शनाप आरोप लगाए जा रहे हैं। कोर्ट में मामला लंबित है इसी कारण सभी कर्मचारियों का वेतन भुगतान किया जा रहा है। किसी विशेष 4 कर्मचारियों पर किसी तरह की कोई मेहरबानी नहीं है, ये सब अनर्गल बातें हैं। न्यायालय के आगामी आदेश के बाद आगे की कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।
अनुराग सिंह, सीईओ, स्मार्ट सिटी

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