
ग्वालियर। जगनापुरा स्थित 100 करोड़ से अधिक की मंदिर की भूमि के मामले में राज्य शासन उच्च न्यायालय में हार गया। हाईकोर्ट की एकल खण्डपीठ ने एक अहम फैसले में राज्य सरकार द्वारा दायर समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया है। राज्य शासन द्वारा दायर समीक्षा याचिका 20 मार्च 2024 को पारित आदेश की पुनः समीक्षा की मांग को लेकर दाखिल की गई थी, जिसे उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने खारिज कर दिया। इस मामले में तत्कालीन संभागायुक्त ने कलेक्टर को पत्र लिखकर जमीन को माफी की बताते हुये जांच करने के निर्देश दिये थे।
जगनापुरा स्थित रामजानकी राधाकृष्ण मंदिर की 100 करोड़ रूपये से अधिक की मंदिर की 19.10 बीघा जमीन को लेकर राज्य शासन उच्च न्यायालय में हार गया। हाईकोर्ट की एकल खण्डपीठ में सेवानिवृत न्यायाधीश एनके मोदी के पक्ष में हुये फैसले पर राज्य शासन ने पुर्नविचार करने की मांग की थी। जिसे उच्च न्यायालय की एकल खण्डपीठ ने 23 जून 2025 को खारिज कर दिया। न्यायालय ने अपना फैसला सुनाते हुये कहा कि राज्य शासन व सरकारी अधिवक्ता ने समीक्षा का कोई ऐसा आधार नहीं बताया जिसके आधार पर आदेश वापस लिया जा सकें। इसीलिये न्यायालय द्वारा दिये गये आदेश की समीक्षा करने का कोई कारण नहीं दिखता। कोर्ट ने कहा कि अभिलेख में कोई त्रुटि नहीं दिखाई देती है। शासन ने तर्क दिया है कि रिट न्यायालय के समक्ष उत्तर दाखिल करने का कोई अवसर दिए बिना ही न्यायालय ने आदेश दिया, जो अवैध है। इस पर कोर्ट ने कहा कि अंतिम आक्षेपित आदेश में किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। इस याचिका की सुनवाई न्यायाधीश मिलिंद रमेश फड़के ने की।
