
इंदौर. शहर से देवास की ओर जाने वाले मार्ग पर जाम और अव्यवस्था अब जानलेवा बनते जा रहे हैं. बीते 24 घंटों में दो लोगों की जान सिर्फ इसलिए चली गई क्योंकि वे समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाए. एक मामला गारी पिपलिया गांव का है, तो दूसरा बिजलपुर निवासी किसान से जुड़ा है. दोनों ही मामलों में देरी की वजह मांगलिया रेलवे क्रॉसिंग का बंद रास्ता और निर्माणाधीन पुल से उपजा भारी जाम रहा.
शुक्रवार के दिन यातायात जाम लगने से दो लोगों की जिंदगी चली गई . पिपलिया गांव में रहने वाले 32 वर्षीय संदीप पटेल को देर रात अचानक दिल का दौरा पड़ा. घबराए परिजन उसे फौरन इंदौर लेकर निकल पड़े, लेकिन मांगलिया क्रॉसिंग बंद होने के कारण उन्हें लंबा चक्कर लगाकर सिंगापुर टाउनशिप वाले रास्ते से जाना पड़ा. वहां भी वाहनों की लंबी कतार में उनकी कार फंस गई और इलाज मिलने से पहले ही संदीप ने दम तोड़ दिया. पत्नी की आंखों के सामने तड़पती मौत ने गांव और परिजन दोनों को झकझोर दिया है.
दूसरी घटना में सैटेलाइट टाउनशिप, बिजलपुर निवासी 62 वर्षीय कमल पांचाल को देवास के रास्ते में घबराहट होने लगी, वे परिवार के साथ अपनी बहन की तेरहवीं में शामिल होने जा रहे थे. अर्जुन बड़ौदा के पास जाम इतना ज्यादा था कि उनकी कार करीब डेढ़ घंटे तक फंसी रही. इस बीच हालत बिगड़ी और उन्हें अस्पताल तक पहुंचने में देरी हो गई. देवास पहुंचते ही डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
इन दोनों मौतों के बाद गुस्साए ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है. किसान नेता हंसराज मंडलोई ने संदीप पटेल के परिवार को 50 लाख मुआवजा, बच्चों की पढ़ाई और पत्नी को पेंशन देने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द रास्ता चालू नहीं किया गया तो क्षेत्रीय लोग आंदोलन करेंगे. वहीं, कांग्रेस नेता मनोज राजानी ने कलेक्टर को पत्र लिखकर मांग की है कि जब तक पुल का निर्माण पूरा नहीं होता, तब तक सर्विस रोड बनाया जाए और टोल टैक्स वसूली रोकी जाए.
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जाम में एम्बुलेंस तक फंसी नजर आ रही हैं. मरीज, स्कूली बच्चे और व्यापारी तक परेशान हैं, स्थानीय पुलिस भी ट्रैफिक नियंत्रण में बेबस नजर आ रही है.
वैकल्पिक रास्ता बनाया
अब प्रशासन ने अस्थायी समाधान के तौर पर ट्रैफिक को व्यासखेड़ी, कदवाली खुर्द, टिगरिया, सिरोलिया होते हुए नेवरी फाटा की ओर मोड़ना शुरू किया है, लेकिन इससे दूरी करीब 50 किलोमीटर बढ़ गई है. सवाल उठता है कि आखिर बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए निर्माण कार्य क्यों शुरू किया गया? और इसका खामियाजा आम जनता अपनी जान देकर क्यों भुगत रही है?.
