कमाऊ स्टेशन : बदहाली का शिकार, सुविधाएं गायब,दुर्दशा पर यात्री नाराज

सीहोर:पश्चिम रेलवे को भरपूर राजस्व देने वाला सीहोर रेलवे स्टेशन प्रबंधन की लापरवाहियों के चलते यात्रियों के लिए अभिशाप बना हुआ है. अनेकनोक कमियों से जूझते यात्रियों को अब बारिश के मौसम में कीचड़ भरे रास्ते से गुजकर प्लेटफार्म पर जाना पड़ रहा है तो गुरुवार से प्लेटफार्म पर आने वाले रास्ते का गेट बंद कर दिए जाने से मंडी क्षेत्र से आने वाले यात्रियों को लंबा फेरा लगाकर रेलवे स्टेशन आना पड़ रहा है.जिला मुख्यालय का रेलवे स्टेशन पश्चिम रेलवे का कमाऊपूत स्टेशन बना हुआ है. जबसे शहर के नजदीक कुबेरेश्वर धाम पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ी है तब से रेलवे की आय में काफी वृद्धि हुई है.

रोजाना सैकड़ों श्रद्धालुओं का आना- जाना टे्रनों से होता है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर यात्री स्वयं को छला हुआ महसूस करते हैं. कोरोनाकाल में बंद हुए अधिकांश ट्रेनों के स्टापेज पांच साल बाद भी शुरू नहीं हो सके हैं. ओवरनाईट एक्सपे्रस सहित अनेक ट्रेन यात्रियों को मुंह चिढ़ाती हुई सरपट निकल जाती हैं. ऐसे में यात्रियों को भोपाल या शुजालपुर जाकर अपनी ट्रेन पकडऩा पड़ती है. यात्रियों द्वारा लंबे समय से स्टापेज की मांग की जा रही है, लेकिन रेलवे के जिम्मेदारों द्वारा अब तक ट्रेनों के स्टापेज शुरू नहीं किए गए हैं.

इतना ही नहीं यात्रियों को यहां व्याप्त अनेक समस्याओं से भी दो चार होना पड़ता है. मसलन यहां यात्रियों की बहुप्रतिक्षित मांग कोच डिस्पले को पूरा करते हुए प्लेटफार्म पर कोच डिस्पले बोर्ड तो लगा दिए हंैं, लेकिन यह कोच की पोजीशिन नहीं बता पाते. इसके अलावा प्लेटफार्म दो से यात्रा की शुरुआत करने वाले यात्रियों को प्लेटफार्म क्रमांक एक पर जाकर टिकट लेना पड़ता है. यहां भी अनारक्षित टिकट के लिए केवल एक खिड़की होने के कारण लंबी कतारें लगती हैं. कई यात्री तो टिकट खरीद भी नहीं पाते और प्लेटफार्म पर ट्रेन आ जाती है. ऐसे में कई यात्रियों को अपना सफर टालना पड़ता है या फिर बिना टिकट बोगी में चढऩे को मजबूर होना पड़ता है.

ऐसी अनेक दिक्कतों का सामना करने वाले यात्रियों को अब बारिश के मौसम में और अधिक परेशानी हो रही है. प्लेटफार्म क्रमांक दो तक जाने वाले रास्ते पर इतनी अधिक कीचड़ हो गई है कि यात्री काफी मशक्कत के बाद अपने कपड़े गंदे करते हुए प्लेटफार्म तक पहुंच पा रहे हैं. सर्वाधिक दिक्कत का सामना महिला व बुजुर्ग यात्रियों को करना पड़ रहा है. गुरुवार से रेलवे प्रबंधन ने मंडी माता मंदिर से आने वाले रास्ते पर गेट लगाकर आवाजाही रोक दी है. ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों व मंडी माता मंदिर, वर्कशाप रोड से आने वाले यात्रियों को लंबा फेरा लगाकर स्टेशन तक पहुंचना पड़ रहा है. उल्लेखनीय है कि सीहोर रेलवे स्टेशन पश्चिम रेलवे को आय देने में छठवें स्थान पर है. आरक्षित व अनारक्षित टिकटों की ब्रिकी से भरपूर आय होने के बाद भी रेल प्रशासन द्वारा यात्रियों को सुविधा नाममात्र भी नहीं दी जा रही है. जिससे यात्रियों में खासा आक्रोश बना हुआ है.
गुरुपूर्णिमा और श्रावण मास में उमड़ेगी भारी भीड़
अमूमन प्रतिदिन हजारों की संख्या में यात्री सीहोर रेलवे स्टेशन से आना- जाना करते हैं, लेकिन प्रमुख अवसरों पर यात्रियों की संख्या में काफी बढ़ोत्तरी हो जाती है. चंद रोज बाद ही गुरुपूर्णिमा पर्व के दौरान स्थानीय कुबेरेश्वर धाम के लिए हजारों यात्रियों का आना बना रहेगा, लेकिन स्टेेशन पर व्याप्त कमियों व कीचड़ के चलते उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा. इतना ही नहीं श्रावण मास में भी आने वाले हजारों यात्री रेलव प्रबंधन की खामियों के चलते परेशान होंगे, क्योंकि प्लेटफार्म पर जारी निर्माण कार्य एक साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है. प्लेटफार्म पर बिखरा मटेरियल व कीचड़ उनकी राह में अड़चन डालेगी.

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