जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन व जस्टिस डीके पालीवाल की युगलपीठ ने भूमियों का अर्जन किए बिना ही कोयला खनन किए जाने के आरोप को गंभीरता से लिया। इसी के साथ केंद्र शासन, सीमेंट कंपनी सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।यह जनहित याचिका उमरिया जिले की ग्राम पंचायत रौगढ़ की ओर से दायर की गई है। जिसमें कहा गया है कि सीमेंट कंपनी को केंद्र सरकार द्वारा उमरिया जिला के पाली तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत रौगढ़ व अन्य पांच पंचायतों की भूमियों में कोल ब्लाक का आवंटन वर्ष 2022-23 में ओपेन माइनिंग हेतु किया गया था।
नियमानुसार 763 हेक्टेयर कोल ब्लाक का आवंटन है। लेकिन कंपनी द्वारा उक्त ग्रामों की भूमियों का अर्जन किए बिना ही व सरफेस राइट प्राप्त किये बगैर अवैधानिक ढंग से खनन किया जाने लगा। साथ ही नियम व आज्ञापक कानूनों का उल्लघंन कर अन्य गतिविधियां प्रारंभ कर दी गईं। उक्त गतिविधि का विरोध संबंधित ग्राम पंचायतों व आम जनता द्वारा किया गया। कलेक्टर के समक्ष आपत्ति प्रस्तुत की गई। किंतु कोई सुनवाई न होने के कारण ग्राम पंचायत रौगढ़ द्वारा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर दी गई है। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है
