नयी दिल्ली, 26 जून (वार्ता) उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्य कांत के नेतृत्व में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) और मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति (एमसीपीसी) अगले माह एक जुलाई से 90 दिवसीय राष्ट्रव्यापी मध्यस्थता ‘राष्ट्र के लिए’ अभियान की शुरूआत करने जा रही है।
न्यायमूर्ति सूर्य कांत नालसा एवं एमसीपीसी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं।
नालसा-एमसीपीसी की विज्ञप्ति बताया गया है कि अभियान एक जुलाई 2025 से शुरू होगा, जो 30 सितंबर 2025 तक चलेगा। इसका उद्देश्य तालुका न्यायालयों से लेकर भारत के उच्च न्यायालयों तक न्यायालयों में लंबित उपयुक्त मामलों का निपटारा करना तथा विवाद समाधान के जन-हितैषी तरीके के रूप में मध्यस्थता को देश के कोने-कोने तक पहुंचाना है।
इस अभियान के तहत मध्यस्थता योग्य मामलों की श्रेणियों में वैवाहिक विवाद मामले, दुर्घटना दावा, घरेलू हिंसा , चेक बाउंस, वाणिज्यिक विवाद, सेवा, आपराधिक समझौता योग्य मामले, उपभोक्ता विवाद, ऋण वसूली मामले, विभाजन, बेदखली, भूमि अधिग्रहण समेत अन्य उपयुक्त सिविल मामले शामिल हैं। मामले की पहचान, पक्षों को सूचना और मध्यस्थों को रेफर करने की प्रक्रिया एक से 31 जुलाई 2025 के दौरान “विशेष मध्यस्थता अभियान के लिए रेफरल हेतु” शीर्षक के अंतर्गत वाद सूची में सूचीबद्ध किया जाएगा। साथ ही, ऐसे सभी मामले जिनमें समझौते का तत्व मौजूद है, उन्हें इस अभियान में मध्यस्थता के लिए भेजा जाएगा।
मध्यस्थता द्वारा निपटाए गए मामलों के संबंध में आंकड़ों के प्रसारण के लिए 4, 11, 18, 25 अगस्त और 1, 8, 15 और 22 सितंबर 2025 की समयसीमा निर्धारित की गई है। मध्यस्थता के लिए संदर्भित कुल मामलों और निपटाए गए कुल मामलों के संबंध में आंकड़ों का संकलन छह अक्टूबर 2025 तक कर एमसीपीसी को भेजा जाएगा।
विशेष अभियान का उद्देश्य हाल ही में 40 घंटे की मध्यस्थता प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले मध्यस्थों सहित सभी मौजूदा मध्यस्थों को शामिल करना है। अभियान में संबंधित पक्षों की सुविधा के अनुसार सप्ताह के सभी सातों दिन मध्यस्थता निपटान के प्रयास किए जाएंगे। इस विशेष अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए मध्यस्थता पूरी तरह से ऑफ़लाइन भौतिक मोड में, पूरी तरह से ऑनलाइन मोड में या दोनों तरीके से आयोजित की जा सकती है। तालुका या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ऑनलाइन मध्यस्थता की सुविधा प्रदान करेगा। इस अभियान की निगरानी संबंधित राज्य के उच्च न्यायालयों की मध्यस्थता निगरानी समिति द्वारा की जाएगी। निपटान प्रयासों में आवश्यकतानुसार परामर्शदाता और/या विषय वस्तु विशेषज्ञ की सहायता ली जाएगी।
राष्ट्रीय अभियान के प्रभावों सहित सभी पहलुओं पर एनजेए भोपाल द्वारा चुनिंदा नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एनएलयू) के सहयोग से एक गहन अध्ययन भी प्रस्तावित किया गया है। लंबित मामलों को निपटाने और लोगों को यह विश्वास दिलाने के लिए पूरे भारत में मध्यस्थता ‘राष्ट्र के लिए’ अभियान शुरू किया जा रहा है। यह अभियान विवाद समाधान के लिए एक तंत्र के रूप में स्थापित करना है। मध्यस्थता लोगों के अनुकूल, लागत प्रभावी और त्वरित है, जिसमें रिश्तों, समय और धन की बचत करने की क्षमता है।
