मध्य-पूर्व में तनाव कम होने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, भारतीय OMC शेयरों पर सकारात्मक असर की उम्मीद

ईरान और इजरायल के बीच तनाव कम होने की उम्मीद से ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल सस्ता; हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम, और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के शेयर पर सकारात्मक प्रभाव संभव।

नई दिल्ली, 24 जून (नवभारत): मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव में कमी आने की उम्मीद के चलते वैश्विक कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में सोमवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष कम होने की खबरों ने बाजार को राहत दी है, जिसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ा है। इस गिरावट से भारत जैसी तेल आयातक अर्थव्यवस्थाओं और विशेष रूप से सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के शेयरों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस बयान के बाद बाजार में सकारात्मकता देखी गई, जिसमें उन्होंने कहा था कि इजरायल और ईरान युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं। हालांकि ईरान ने बाद में इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, लेकिन ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग्ची के उस बयान ने बाजार को थोड़ी राहत दी कि अगर इजरायल सुबह 4 बजे तक हमला बंद कर देता है, तो ईरान आगे जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा। इस बयान को तनाव कम करने की दिशा में एक कदम के रूप में देखा गया, जिसके परिणामस्वरूप क्रूड ऑयल की कीमतें नीचे आईं। बेंचमार्क अमेरिकी कच्चे तेल (WTI) की कीमतें 7% से अधिक गिरकर $68 प्रति बैरल के आसपास आ गईं, जो संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर के करीब है।

OMC के मार्जिन सुधरने की उम्मीद, निवेशकों की निगाहें शेयर बाजार पर

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा फायदा भारत की तेल विपणन कंपनियों जैसे हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL), और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) को मिलेगा। इन कंपनियों के लिए कच्चा तेल एक प्रमुख इनपुट लागत है। जब कच्चे तेल की कीमतें कम होती हैं, तो OMCs के मार्केटिंग मार्जिन में सुधार होता है, क्योंकि वे अक्सर घरेलू बाजार में खुदरा ईंधन की कीमतों को तुरंत कम नहीं कर पाती हैं। इससे उनकी लाभप्रदता बढ़ती है।

हाल के समय में, उच्च कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें न बढ़ा पाने के कारण OMCs के मार्जिन पर दबाव देखा गया था। लेकिन अब कीमतों में नरमी से निवेशकों की इन कंपनियों के शेयरों में दिलचस्पी बढ़ सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि मध्य-पूर्व में तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो OMCs के लिए यह एक अनुकूल स्थिति होगी, जिससे उनके वित्तीय प्रदर्शन में सुधार आ सकता है।

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