संस्कृति ज्ञान परीक्षा के प्रतिभागियों और शिक्षकों का सम्मान 

खरगोन। मुझे नही मेरे विचारों को पूजो…गुरुदेव का यह सद्वाक्य आज समूचे विश्व में विचारों की क्रांति बना हुआ है। यही गायत्री परिवार की राष्ट्र, मानव धर्म को पहले रखने की भावना को जाग्रत करने का भाव है। गायत्री परिवार तेजी से बढती आधुनिकता के दौर में हमारी संस्कृति, संस्कारों, रीति- रिवाजों से न केवल समाज बल्कि भावी पीढ़ी में भी नि: स्वार्थ भाव से पोषित कर रहा है। गायत्री संस्कृति ज्ञान परीक्षा भी इसी का हिस्सा है। इस जन और समाज कल्याण के लिए गायत्री परिवार साधुवाद का पात्र है। उक्त विचार रविवार को गायत्री मंदिर परिसर में आयोजित शांतिकुंज हरिद्वार द्वारा आयोजित अभा संस्कृति ज्ञान परीक्षा के प्रतिभागियों के पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान अतिथियों ने व्यक्त किए। समारोह में बतौर अतिथी समाजसेविका सरिता बाफना, प्राचार्य अन्नु भाई पटेल, प्राचार्य राजेंद्र पाटीदार, पत्रकार सुनील शर्मा, जोगीलाल मुजाल्दे ने जिला स्तर पर चयनित प्रतिभागियों को नकद राशि और प्रमाण- पत्र के साथ ही सद्वाक्य के साथ पुरस्कृत कर प्रोत्साहित किया। जिला संयोजक बीएस मंडलोई ने बताया कि परीक्षा में 30 हजार615 विद्यार्थी सम्मिलित हुए थे। यह परीक्ष 600 केंद्रों पर नवंबर माह में आयोजित की गई थी।

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