पुणे पुल हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर चार हुई, 51 घायल: 32 साल पुराने ‘खतरनाक’ पुल पर भीड़ का दबाव बना काल, बचाव अभियान समाप्त

मावल तहसील के कुंडलमाला में इंद्राणी नदी पर बना पैदल पुल टूटा; चेतावनी के बावजूद भीड़ और जर्जर स्थिति बनी हादसे की वजह, PM और CM ने जताया दुख।

पुणे, 16 जून (वार्ता): महाराष्ट्र के पुणे जिले में मावल तहसील के कुंडलमाला क्षेत्र में इंद्राणी नदी पर बने एक पैदल पुल के रविवार को ढह जाने से मृतकों की संख्या बढ़कर चार हो गई है, जबकि 51 लोग घायल हुए हैं। लगभग 15 घंटे तक चले सघन बचाव अभियान को राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) ने समाप्त कर दिया है, क्योंकि सभी लापता व्यक्तियों का पता लगा लिया गया है। यह 32 साल पुराना पुल, जिसे कथित तौर पर पहले ही असुरक्षित घोषित कर दिया गया था, पर्यटकों की भारी भीड़ के दबाव के कारण ढहा।

जिला कलेक्टर जितेंद्र डूडी ने बताया कि यह घटना रविवार दोपहर 3:15 बजे हुई और प्रशासन को 3:30 बजे इसकी सूचना मिली। मृतकों की पहचान चंद्रकांत साल्वे, रोहित माने और विहान माने के रूप में हुई है, जबकि चौथा मृतक अभी भी अज्ञात है। अधिकारियों के अनुसार, यह संकरा पैदल पुल, जो मुख्य रूप से किसानों के आवागमन के लिए बनाया गया था, चेतावनी बोर्ड लगे होने के बावजूद लगभग 150-200 पर्यटकों से भरा हुआ था। महाराष्ट्र के जल संसाधन और आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि पुल अत्यधिक भार के कारण ढह गया। उन्होंने बताया कि चेतावनी के बावजूद लोग इस पर खड़े थे, जिससे यह हादसा हुआ। स्थानीय निवासियों ने भी बताया कि पुल को दो साल पहले ही असुरक्षित घोषित कर दिया गया था, लेकिन सप्ताहांत में पर्यटक अक्सर चेतावनी को नजरअंदाज कर देते थे। कई घायलों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है, हालांकि सभी खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बात कर घटना और बचाव कार्यों की जानकारी ली है, जबकि मुख्यमंत्री फडणवीस ने मृतकों के परिजनों के लिए 5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि और घायलों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है। इस घटना ने एक बार फिर भारत में बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पुल गिरने से करीब पांच मिनट पहले ही हिलना शुरू हो गया था, जिसके बाद चीख-पुकार मच गई और दर्जनों लोग पानी में गिर गए। स्थानीय लोगों और बचाव दलों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया। इस त्रासदी ने अधिकारियों को राज्य भर में पुराने और जर्जर पुलों के स्ट्रक्चरल ऑडिट करने का निर्देश देने के लिए प्रेरित किया है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

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