संकट में किसान: जेब खाली, मंडी बंद और 67 हजार के बिल के लिए 5 लाख का ट्रैक्टर जब्त

सीहोर। जिले का अन्नदाता इस समय दोहरी मार झेलने को मजबूर है. एक ओर खेतों में खड़ी फसल पूरी तरह पककर तैयार है, तो दूसरी ओर उसे बेचने के लिए मंडियों के दरवाजे बंद पड़े हैं. इसी बीच बिजली कंपनी द्वारा बकाया वसूली के लिए अपनाया जा रहा सख्त रवैया किसानों की मुश्किलें और बढ़ा रहा है. हालात यह हैं कि किसान न तो अपनी उपज बेच पा रहा है और न ही जेब खाली होने के कारण बिजली बिल चुका पा रहा है.

जिले में इन दिनों बिजली कंपनी द्वारा वसूली अभियान तेज कर दिया गया है. बकाया राशि की वसूली के लिए किसानों की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई लगातार सामने आ रही है. हाल ही में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जिसमें मात्र 67 हजार रुपये के बकाया बिजली बिल के एवज में एक किसान का लगभग 5 लाख रुपये कीमत का ट्रैक्टर जब्त कर लिया गया. यह घटना अकेली नहीं है, बल्कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों में किसानों के ट्रैक्टर, कृषि यंत्र और अन्य संसाधनों की कुर्की की जा रही है.

किसानों का कहना है कि फसल कटाई और बिक्री के इस महत्वपूर्ण समय पर इस तरह की कार्रवाई उन्हें आर्थिक ही नहीं, मानसिक रूप से भी तोड़ रही है. उनका तर्क है कि जब तक फसल बिकेगी नहीं, तब तक वे बकाया राशि कैसे चुकाएं.

किसानों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि अभी तक समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी शुरू नहीं हुई है. मंडियों में नीलामी प्रक्रिया भी लगातार छुट्टियों के कारण बाधित है. ऐसे में किसानों के पास न तो नकदी है और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था. मजबूरी में उन्हें उपज औने-पौने दामों पर बेचना पड़ रहा है या कुर्की का सामना करना पड़ रहा है.

अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को लेकर भी किसानों में चिंता बनी हुई है. ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव के चलते उन्हें आशंका है कि सरकार गेहूं के निर्यात पर रोक लगा सकती है, जिससे बाजार भाव गिर सकते हैं. ऐसे में किसान चाहते हैं कि वे जल्द से जल्द अपनी फसल बेच लें, लेकिन मंडियों में अवकाश उनके लिए सबसे बड़ी बाधा बन गया है.

मंडी में 11 दिन में केवल दो दिन काम

त्योहारों और वित्तीय वर्ष के अंत के चलते मंडी संचालन पर भी असर पड़ा है. 26 मार्च से 5 अप्रैल के बीच सीहोर मंडी में केवल दो दिन—2 अप्रैल और 4 अप्रैल—को ही नीलामी कार्य हो पाएगा. इस दौरान अष्टमी, रामनवमी, बैंक अवकाश, रविवार, क्लोजिंग, के अलावा महावीर जयंती, वार्षिक लेखाबंदी और गुड फ्राइडे जैसे अवकाशों के कारण मंडी लगभग बंद ही रहेगी. इससे किसानों की परेशानी और बढ़ गई है.

प्रशासन से राहत की मांग

जिले के किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि पीक सीजन को देखते हुए मंडियों में नीलामी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, ताकि उनकी उपज समय पर बिक सके. साथ ही बिजली कंपनी द्वारा की जा रही कुर्की की कार्रवाई पर भी फिलहाल रोक लगाने की मांग उठाई गई है. किसानों का कहना है कि जब तक उनकी फसल नहीं बिकती, तब तक उनसे वसूली करना अन्यायपूर्ण है.

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