
माॅस्को, 14 जून (वार्ता) संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के आंकड़ों के अनुसार रूस कम से कम दो साल तक सबसे बड़ा गेहूं निर्यातक देश बना रहेगा।
रूस की संवाद समिति ने एफएओ के हवाले से कहा है कि चालू तथा अगले कृषि वर्ष के दौरान गेहूं के कुल वैश्विक निर्यात में रूस का योगदान 20 प्रतिशत से ऊपर रहने की संभावना है।
एफएओ की गुरुवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया कि 2024-25 कृषि वर्ष में वैश्विक गेहूं निर्यात लगभग आठ प्रतिशत घटकर 19.33 करोड़ टन रहने का अनुमान है। यह चार साल के निर्यात का न्यूनतम स्तर होगा। संयुक्त राष्ट्र के इस संगठन के अनुसार अगले कृषि वर्ष में वैश्विक स्तर पर गेहूं का निर्यात में ज्यादा से ज्यादा 3.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 20.06 करोड़ टन तक रहेगा।
रिपोर्ट में एफएओ के विश्लेषकों ने लिखा है, ‘रूस दुनिया के सबसे बड़े गेहूं निर्यातक की अपनी स्थिति को बनाये रख सकता है।’
संगठन के पूर्वानुमानों के अनुसार, 2024-25 कृषि वर्ष में रूस से गेहूं का निर्यात 4.26 करोड़ टन होगा, जो पिछले तीन साल के उसके औसत वार्षिक निर्यात 4.20 करोड़ टन से थोड़ा अधिक है। अगले फसल वर्ष में यह बढ़कर 4.65 करोड़ टन तक पहुंच सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार रूस विश्व के गेहूं बाजार में इन दो वर्षों में क्रमशः 22 प्रतिशत और 23 प्रतिशत की आपूर्ति करेगा। जबकि पिछले तीन वर्षों में उसका योगदान औसतन 20.7 प्रतिशत रहा है।
एफएओ के आंकड़ों के अनुसार, यूरोपीय संघ इस वर्ष 2.4 करोड़ टन गेहूं का निर्यात ही कर पायेगा जबकि पिछले तीन साल से इसका औसत वार्षिक निर्यात 3.27 करोड़ टन था। आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया के दूसरे सबसे बड़े गेहूं आपूर्तिकर्ता यूरोपीय संघ का निर्यात अगले कृषि वर्ष में बढ़कर 3.07 करोड़ टन हो जायेगा।
कनाडा इस साल गेहूं का तीसरा बड़ा निर्यातक रहेगा। अनुमान है कि इस बार उसका निर्यात 19 प्रतिशत बढ़ कर 2.60 करोड़ टन के दायरे में रहेगा और अगले साल इसके थोड़ा घटकर 2.55 करोड़ टन रहने की संभावना है।
