
बेंगलुरु 14 जून (वार्ता) लगातार आठ महीने की गिरावट के बाद इस वर्ष मई में नौकरियों की पोस्टिंग में जबरदस्त 8.9 प्रतिशत वृद्धि देखी गयी है।
ग्लोबल मैचिंग और हायरिंग प्लेटफॉर्म इनडीड द्वारा जारी नए आंकड़ों के मुताबिक हालांकि यह एक साल पहले के मुकाबले 1.8 प्रतिशत और अपने शिखर से लगभग 16 प्रतिशत कम है। हाल ही में हुई गिरावट के बाद भी भारतीय नौकरियों की पोस्टिंग कोविड-पूर्व स्तर की तुलना में लगभग 80 प्रतिशत ज़्यादा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इंग्लैंड, न्यूज़ीलैंड और स्विटज़रलैंड जैसे कई देशों में पोस्टिंग वॉल्यूम इस समय कोविड-पूर्व स्तर की तुलना में कम है। अगर इस तुलना को देखा जाए, तो भारत में पोस्टिंग वॉल्यूम बहुत अच्छा है। भारत में लगभग 80 प्रतिशत व्यवसायों में नौकरियों की पोस्टिंग पिछले तीन महीनों में काफी बढ़ी है। सबसे ज़्यादा नौकरियाँ चाइल्डकेयर (27 प्रतिशत), पर्सनल केयर एवं होम हेल्थ (25 प्रतिशत), शिक्षा (24 प्रतिशत) और उत्पादन एवं विनिर्माण (22 प्रतिशत) बढ़ीं है। इस वृद्धि से डेंटल सेक्टर में नौकरियों में आई कमी की कुछ भरपाई हो सकती है, जो पिछले तीन महीनों में 10.2 प्रतिशत कम हुई हैं। इसके अलावा, कृषि और वानिकी (8.6 प्रतिशत), सामुदायिक और सामाजिक सेवा (6.8 प्रतिशत) और सॉफ़्टवेयर विकास (4.2 प्रतिशत) की कमी देखी गयी है।
हालाँकि हाल ही में सॉफ़्टवेयर डेवलपमेंट में अवसर कम हुए हैं, पर इनडीड पर यह सेक्टर सबसे अधिक नौकरियां पोस्ट करता है, हर पाँच भारतीय नौकरी की पोस्टिंग में एक पोस्टिंग इसी सेक्टर की होती है। इससे साफ होता है कि भारत के उभरते हुए औपचारिक क्षेत्र में तकनीकी क्षेत्र का कितना प्रभाव रहा है, जिसमें मल्टीनेशनल कंपनियाँ भारत के विशाल प्रतिभा पूल को अवसर प्रदान कर रही हैं।
इनडीड के मुताबिक मई 2025 तक, 1.5 प्रतिशत नौकरियों के लिए जनरेटिव एआई के कौशल की स्पष्ट मांग की गई थी, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुने से भी अधिक है। जनरेटिव एआई के अवसर तकनीक के क्षेत्र पर केंद्रित हैं, जो लगातार बढ़ते जा रहे हैं। लगभग 12.5 प्रतिशत डेटा एनालिटिक्स पदों के लिए जनरेटिव एआई की मांग की गई।
इनडीड के वरिष्ठ अर्थशास्त्री ( एशिया-पैसिफिक) कैलम पिकरिंग ने कहा कि भारत में नौकरियाँ अन्य देशों के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढ़ रही हैं, क्योंकि देश में अधिक औपचारिक आर्थिक व्यवस्थाओं का निर्माण हो रहा है। देश में होते इस बदलाव के साथ औपचारिक क्षेत्र में नौकरियाँ पूरे देश में हो रही रोजगार वृद्धि के मुकाबले ज़्यादा तेजी से बढ़ेंगी, जो हमें पिछले सालों में देखने को मिला है। अन्य अर्थव्यवस्थाओं में इस तरह के बदलाव नहीं हो रहे हैं।
