मिडिल ईस्ट से अमेरिकी वापसी और ट्रंप का ईरान पर सख्त संदेश: ‘परमाणु बम नहीं बना सकता, वेरी सिंपल’

अमेरिका ने मध्य पूर्व से गैर-जरूरी कर्मियों को हटाना शुरू किया, इजरायल-ईरान तनाव के बीच ट्रंप की चेतावनी: ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

वाशिंगटन, 12 जून (वार्ता): मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, खासकर इजरायल और ईरान के बीच गहराते गतिरोध के मद्देनजर, संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस क्षेत्र से अपने गैर-जरूरी कर्मियों और सैन्य परिवार के सदस्यों को हटाना शुरू कर दिया है। इसी बीच, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अपनी सख्त चेतावनी दोहराई है, जिसमें उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि ईरान को परमाणु बम बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

अमेरिकी विदेश विभाग और सैन्य सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के कारण यह निकासी शुरू की गई है। इसमें इराक में अमेरिकी दूतावास के गैर-आपातकालीन कर्मचारियों की वापसी और बहरीन, कुवैत सहित मध्य पूर्व के विभिन्न स्थानों से सैन्य आश्रितों की स्वैच्छिक वापसी को अधिकृत किया गया है। यह कदम तब आया है जब ईरान के तेजी से बढ़ते परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता गतिरोध पर पहुंच गई है। डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्थिति पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र “एक खतरनाक जगह” बन सकता है।

ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में ईरान को कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “वे परमाणु हथियार नहीं रख सकते। बहुत सरल। वे परमाणु हथियार नहीं रख सकते। हम इसकी अनुमति नहीं देंगे।” यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायल द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर संभावित हमले की खबरें भी सामने आ रही हैं, और यूके ने भी मध्य पूर्व में वाणिज्यिक जहाजों के लिए नए खतरों की चेतावनी जारी की है। ट्रंप, जिन्होंने अपने पहले कार्यकाल में 2015 के ईरान परमाणु समझौते (JCPOA) से अमेरिका को बाहर कर लिया था, एक नए समझौते की तलाश में हैं जो ईरान के परमाणु गतिविधियों पर अधिक प्रतिबंध लगाए। हालांकि, उन्होंने हाल ही में यह भी स्वीकार किया कि ईरान के साथ किसी समझौते पर पहुंचने को लेकर उनका आत्मविश्वास कम हो रहा है। ईरान ने हालांकि बार-बार जोर दिया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) और पश्चिमी खुफिया एजेंसियां ​​उसके 2003 तक एक संगठित हथियार कार्यक्रम होने का संकेत देती हैं।

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