जबलपुर: धुआं ऐसा कि कोई दमा या खांसी का गंभीर मरीज हो तो उसकी जान निकल जाए.. न किसी जिम्मेदारों की कार्रवाई का खौफ. न किसी की जान की परवाह और न किसी के स्वास्थ्य से कोई मतलब.. बस हाथों में स्टेयरिंग और तेज रफ्तार से वाहन को भगाना, ये हाल है नगर निगम के उस कचरा वाहन चालक का जो त्रिपुरी चौक से होते हुए मेडिकल तरफ जा रहा था। लेकिन चालक जो गाड़ी चला रहा था उसमें ऐसा धुआं निकल रहा था जैसे उसमें आग लग गई हो। धड़ल्ले से प्रदूषण फैलाते हुए चालक अंतत: मेडिकल की ओर निकल गया लेकिन राहगीरों व आसपास के लोगों को प्रदूषित करने में उसने कोई कसर नहीं छोड़ी।
हैरानी होती है नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों के रवैये की जो कचरा वाहनों का रखरखाव ठीक ढंग से रख नहीं पाते और जर्जर अवस्था में पड़े कचरा वाहन सड़कों पर प्रदूषण फैलाते फर्राटे भरते हैं। तस्वीर देखकर खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि यह कचरा वाहन क्या वाकई में सड़क पर चलने लायक है कि नहीं। ऐसे में इंदौर की तर्ज पर जबलपुर के स्वच्छता में नंबर 1 आने के नगर निगम कमिश्नर प्रीति यादव के सपने को कैसे पूरा किया जा सकेगा ये सवाल खुद धुआं फेंकती हुई तस्वीर बयां कर रही है।
