विशुद्ध सागर महाराज ने साधना और विस्मरण के भाव पर दिया संदेश

भोपाल। नंदीश्वर जिनालय में पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि “साधना का मार्ग, भूलने का मार्ग है।” जो राग-द्वेष और कषायों को भूल जाता है, वही सुखी रहता है। उन्होंने कहा कि दुनिया को अपने अनुसार चलाने की इच्छा रखने वाला सदैव दुखी रहता है, जबकि अपनी बुद्धि और योग्यता से चलने वाला ही संसार में सुख प्राप्त करता है। प्रवक्ता अंशुल जैन के अनुसार, शांति नाथ जिनालय में आचार्य संघ के सान्निध्य में भगवान शांति नाथ का अभिषेक और मंत्रोच्चारण के साथ शांतिधारा हुई। मंदिर परिसर में “हे स्वामी नमोस्तु” के स्वर गूंजते रहे। आचार्य श्री को आहार कराने का सौभाग्य पंडित विमल सौरया और डॉ. सर्वज्ञ सौरया परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर समाज के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। आचार्य संघ ने पदविहार कर अशोका गार्डन जिनालय में प्रवेश किया, जहां भव्य स्वागत किया गया।

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