नमामि गंगे से जीवनदान, अतिक्रमण से जूझती मुरार नदी

रविन्द्र सिंह चौहान

ग्वालियर: कभी उपनगर मुरार की पहचान कही जाने वाली मुरार नदी के जीर्णोद्धार के लिए यद्यपि नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रयास से इन दिनों काफी काम हो रहा है लेकिन नदी की बदहाली छिपाए नहीं छिप रही है। भू-माफियाओं द्वारा नदी के बहाव क्षेत्र में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के कारण नदी संकट में है। इसके अतिरिक्त, सीवर के पानी और अवैध खनन भी नदी के दूषित होने का कारण बन रहे हैं।

नवभारत ने मौके पर जाकर देखा कि भू-माफियाओं द्वारा नदी के बहाव क्षेत्र में पक्के निर्माण किए गए हैं, जिससे पानी का बहाव बंद हो गया, जिसे अब खुलवाया जा रहा है। हुरावली क्षेत्र में बसी बस्तियों से निकलने वाले सीवर का पानी मुरार नदी में गिर रहा है, जिससे नदी प्रदूषित हो रही है। नदी के आसपास अवैध खनन भी किया जा रहा है, जिससे नदी का जलस्तर घट रहा है, रमौआ और अलापुर डेम से पानी के निकासी वाले पुलों पर भी पिछले कई वर्षों से सफाई नहीं होने के कारण पानी मुरार नदी में नहीं पहुंच पा रहा था, लेकिन अब स्वच्छता अभियान चलाकर नदी को पुराने स्वरूप में लाने की कोशिश है।

हुरावली से शहीद गेट तक 12 छोटे-बड़े नालों का गंदा पानी नदी में गिर रहा है, इन कारणों से मुरार नदी की स्थिति खराब हो गई है और यह धीरे धीरे एक नाले में तब्दील हो गई है। हालांकि नमामि गंगे योजना के तहत इस पुरानी नदी को जीवनदान देने की कोशिश हो रही है। ड्रोन सर्वे भी किया गया है। स्थानीय पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल ने मुरार नदी की सफाई के लिए कई दिनों तक अभियान चलाया। नदी के जीर्णोद्धार के लिये किए जा रहे कार्यों का केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, कलेक्टर एवं निगमायुक्त अवलोकन कर चुके हैं।
इनका कहना है…
नदी में अतिक्रमण पर तत्परता से कर रहे कार्रवाई मुरार नदी में अतिक्रमण का कोई भी प्रकरण चिन्हित होता है तो उस पर तत्परता से कार्रवाई की जाएगी, नदी के किनारे वृक्षारोपण के कार्य को जन आंदोलन बनाया जाएगा। नदी में मिलने वाले गंदे पानी को चिन्हित करने एवं मुरार नदी के जल को रोकने के लिये किए गए अतिक्रमण को चिन्हित करने हेतु ड्रोन से सर्वे कराया गया है।
रुचिका चौहान, कलेक्टर, ग्वालियर
जनभागीदारी से नदी को मिल रहा जीवनदान
मुरार नदी जीर्णोद्धार के लिए जनभागीदारी और आमजनों के संयुक्त प्रयास से व्यापक अभियान चलाया गया है। नदी गहरीकरण व साफ-सफाई के काम के अलावा पौधे रोपकर उन्हें ट्रीगार्ड व कांटों की बाड़ लगाकर सुरक्षित किया है।
मुन्नालाल गोयल, पूर्व विधायक

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