
सुसनेर। एक ओर जहां प्राचीन जल धरोहर को सहेजने के लिए प्रशासन के द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है, तो वहीं दूसरी ओर ग्रामीण अंचल में भी रहवासी अपने स्तर से प्रयास कर जल संरक्षण की दिशा में मिसाल पेश कर रहे हैं. सालरिया के ग्रामवासियों ने गांव में जन सहयोग से शनि मंदिर का निर्माण कर प्राण प्रतिष्ठा करवाई, तो लगे हाथ अतिप्राचीन सालरिया की बावड़ी का भी जीर्णोद्धार करवाकर उस पर रंग रोगन करते हुए उसको पुन: अपने अस्तित्व में लौटा दिया. इतना ही नहीं बल्कि उसमें कोई बच्चा गिर न जाए, इसके लिए लोहे की पतली जाली भी लगाई गई. साथ ही बावड़ी के आसपास मुंडेर के साथ ही लोहे की गैलेरी भी बनाई गई है.
धर्मस्व विभाग के अधीन, फिर भी देख-रेख नहीं
यह बावड़ी धर्मस्व विभाग के अधीन भी है. साथ ही प्रशासन के अधीन समीप स्थित शिव मंदिर भी धर्मस्व विभाग से जुड़ा हुआ है. ग्रामवासियों ने इसके जीर्णोद्धार के लिए तत्कालीन एसडीएम को आवेदन भी दिया था, लेकिन उसके बाद भी प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया. ऐसे में अब ग्रामवासियों ने स्वयं बीड़ा उठाया और इसे पुन:अपने अस्तित्व में लौटा दिया.
