
रीवा।बिजली विभाग बकायादारो से पैसा नही निकाल पा रहा है, कनेक्शन विच्छेद करने के साथ वसूली की कार्यवाही की जा रही है, इसके बाद भी बकायादार पैसा नही जमा कर रहे है. अधिकारियों को पसीना छूट रहा है. मई के महीने में 80 करोड़ 67 लाख का लक्ष्य दिया गया था. लेकिन बमुश्किल से लगभग 28 करोड़ की वसूली हो पाई है.
जिले भर में बकायादारो के कनेक्शन काटने का अभियान चलाया गया. हालाकि इससे फर्क पड़ा और राजस्व भी आया. लेकिन लक्ष्य से बहुत पीछे वसूली रह गई है. शहर संभाग हर बार अच्छी वसूली करता है जबकि ग्रामीण क्षेत्रो से वसूली का पैसा बहुत कम आता है. इस बार मई में बिजली की खपत ज्यादा थी और वसूली को लेकर जिले भर में अभियान भी चलाया गया. परिणाम स्वरूप 28 करोड़ के आसपास वसूली हुई. शहर संभाग को 19.34 करोड़ वसूली का लक्ष्य था जिसमें साढ़े 17 करोड़ आया है. इसी तरह पूर्व संभाग में 17.19 करोड़ के विरूद्ध ढ़ाई करोड़ की वसूली हुई है. मऊगंज संभाग में 14.80 करोड़ के विरूद्ध 2.34 करोड़ की वसूली हो पाई है. पश्चिम संभाग एवं त्योंथर संभाग में भी लक्ष्य के अनुरूप बहुत कम वसूली हुई है. शहर के उपभोक्ता बिजली बिल जमा कर देते है, जिसके कारण लक्ष्य पूरा हो जाता है. लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ता बिल जमा करने आगे नही आते. शहर में इस बार अलग-अलग टीम गठित की गई थी और पांच हजार से अधिक बकायादारो के कनेक्शन काटे गये. परिणाम यह रहा कि बकायादारो न पैसा जमा कर दिया. करोड़ो रूपया रीवा क्षेत्र में एरियर्स का बकाया है. हर महीने जो बिल का लक्ष्य दिया जाता है उसके अनुरूप वसूली नही हो पाती है. करोड़ो रूपया जिले के उपभोक्ता विभाग का दबाकर बैठे है.
जर्जर विद्युत केबिलो से हो रही सप्लाई
बरसात आने के पहले विद्युत लाइनो का मरम्मत किया जाता है और लाखो रूपये इस पर खर्च होते है. शहर में जर्जर विद्युत केबिलो से सप्लाई हो रही है. गर्मी के महीने में कही केबिल जल रही है तो कही लोड़ ज्यादा होने के कारण टांसफार्मर, जिसके कारण विद्युत आपूर्ति ठप्प रहती है और उपभोक्ताओं को अंधेरे में रहना पड़ता है. शहर में लगे फ्यूज बाक्स खुले है और केबिले जर्जर है जो हादसे को आमंत्रण दे रहे है. जर्जर केबिला को बदलने के लिये पर्याप्त बजट होता है फिर भी जर्जर केबिले नही बदली जाती है. बांस-बल्ली लगाकर केबिलो को टिकाया गया है. दस दिन बाद मानसून शुरू हो जायेगा लेकिन अभी कई जगहो लाइनो का मरम्मत कार्य नही किया गया है. ग्रामीण क्षेत्रो की हालत तो बद से बदतर है.
