नयी दिल्ली, (वार्ता) तमाम चुनौतियों के बावजूद भारतीय निर्यात संघों के महासंघ फियो को विश्वास है कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल निर्यात (वस्तु और सेवा निर्यात को मिला कर) पहली बार एक ट्रिलियन डालर (एक हजार अरब डॉलर) के स्तर तक पहुंच जाएगा।
फियो के अध्यक्ष एस सी रल्हन ने मंगलवार को यहां संवादाताओं के साथ एक अनौपचारिक चर्चा में कहा,“ हम वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक एक ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर (एक हजार अरब डॉलर) के निर्यात का लक्ष्य बना रहे हैं, जिसमें वस्तुओं का निर्यात 525-535 अरब डॉलर और सेवाओं का 465-475 अरब डॉलर तक तक पहुंचाने का लक्ष्य है।”
उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में वस्तु निर्यात में लगभग 12 प्रतिशत की वृद्धि और सेवा निर्यात में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद की जा सकती है।
उल्लेखनीय है कि 31 मार्च को समाप्त वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का कुल निर्यात रिकॉर्ड 824.9 अरब डॉलर रहा, जो इससे पिछले वित्त वर्ष के 778.1 अरब डॉलर से 6.01 प्रतिशत अधिक है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), व्यवसाय, वित्तीय और यात्रा-संबंधी सेवाओं में मजबूत प्रदर्शन के कारण वर्ष 2024-25 में सेवा निर्यात 13.6 प्रतिशत बढ़कर 387.5 अरब डॉलर के बराबर रहा जबकि वस्तु निर्यात 437.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इस दौरान गैर-पेट्रोलियम वस्तुओं का निर्यात रिकॉर्ड 374.1 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष से 6 प्रतिशत अधिक है।
फियो अध्यक्ष ने कहा कि निर्यात क्षेत्र की इस इस गति को बनाये रखने और वस्तु तथा सेवा निर्यात दोनों में निरंतर वृद्धि हासिल करने के लिए निर्यात बाजारों का विविधीकरण, मूल्य-वर्धित उत्पादों को बढ़ावा देने, व्यापार समझौतों को मजबूत करने , निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे में निवेश, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने से भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार जैसे उपायों पर बल दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि निर्यात समुदाय इस दिशा में सरकार के साथ कंधे से कंधा मिला कर काम कर रहा है।
फियो अध्यक्ष ने कहा कि लघु और मध्यम उद्यमों (एसएमई) के लिए इस तरह से सहायता करने की जरूरत है, ताकि वित्त और बाजार की उनकी जानकारी बढ़े और वे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अधिक प्रभावी ढंग से भाग ले सकेंगे।
उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकियों को अपनाने से, खासकर सेवा क्षेत्रों में निर्यात के लिए नये रास्ते खुल सकते हैं।
