सीहोर। जिले में इन दिनों जोर- शोर से जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत जल संरक्षण से संबंधित अनेक गतिविधियां की जा रही हैं, लेकिन आष्टा तहसील में अभियान को सही दिशा नहीं मिल सकी है. यही कारण है कि ग्राम चुपाडिय़ा व सियाखेड़ी के दो स्टापडेम की सुध लेने के लिए कोई भी नहीं पहुंच सका है.
जिले की प्रमुख पार्वती नदी पर 2011 में आष्टा विकासखंड के ग्राम चुपाडिय़ा और सियाखेड़ी में पेयजल समस्या दूर करने और ग्रामीणों को फसलों में सिंचाई के उद्देश्य से बनाए गए दो स्टाप डैम में से एक अधूरा है तो दूसरा क्षतिग्रस्त है. हालत यह है कि ग्राम चुपाडिय़ा में स्टाप डेम का निर्माण कार्य अधूरा ही रह गया, जबकि ठेकेदार ने निर्माण के पूरे पैसे निकाल लिए और विभाग ने भी ठेकेदार को बिना मौका निरीक्षण किए बगैर भुगतान कर दिया. इसके अलावा सियाखेड़ी का डेम पूरी तरह क्षतिग्रस्त है.
स्टापडेम बनाने का उद्देश्य था कि पार्वती नदी के पानी को रोका जाए और रबी की फसल में सिंचाई हो तथा गर्मियों के दिनों में ग्रामीणों को पेयजल समस्या से निजात मिल सके, लेकिन अधूरे पड़े स्टाप डेम के कारण ग्रामीणों को इससे न तो सिंचाई के लिए पानी मिल पाया है और न ही जलसंकट दूर हो सका है. हैरत की बात तो यह है कि अधूरे निर्माण का भुगतान भी किया जा चुका है, जिसको लेकर ग्रामीणों ने वरिष्ठ अधिकारियों तक पूरे मामले की शिकायत की, लेकिन दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी.
तत्कालीन विधायक ने भी जिम्मेदारों को लिखा था पत्र
सन 2018 में आष्टा के तत्कालीन विधायक रणजीत सिंह गुणवान ने जल संसाधन विभाग के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर यह बात बताई थी कि चुपाडिय़ा का स्टाप डेम जिस दिन से बना है, उसी दिन से इसमें कोई शटर नहीं लगी है, वहीं निर्माण कार्य अधूरा है, लेकिन अब तक स्थिति वही है. यही कारण है कि पूरा क्षेत्र सिंचाई के लिए परेशान है और पेयजल संकट से जूझ रहा है.
संबंधित अधिकारी से करता हूं बात
यदि रणजीत सिंह गुणगान ने इस संबंध में पत्र लिखा था, तो विभाग को चुपाडिय़ा डेम को दुरुस्त करना चाहिए. बाकी अभी आपके द्वारा यह मामला मेरे संज्ञान में लाया गया है. मैं जल्द ही संबंधित विभाग से बात कर डैम की मरम्मत करवाता हूं।
गोपालसिंह इंजीनियर,
विधायक, आष्टा विस क्षेत्र
आपके द्वारा जिन स्टाप डेम के बारे में अवगत कराया जा रहा है. वहां से लगातार शिकायतें हमें प्राप्त हो रही हैं, यह मामला मेरे कार्यकाल का नहीं है. मुझे जो भी शिकायत मिलती है, शीर्ष कार्यालय को भेज देता हूं.
एमके शर्मा,
एसडीओ, जल संसाधन
