जुबा/संयुक्त राष्ट्र, 23 मई (वार्ता) संयुक्त राष्ट्र ने युद्धग्रस्त सूडान में मानवीय स्थिति बिगड़ने की चेतावनी दी है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कल यहां कहा कि सूडान के विभिन्न क्षेत्रों में संघर्ष बढ़ने से नागरिक घरों से निकलकर आश्रयस्थलों में जा रहे हैं।
प्रवक्ता ने अंतरराष्ट्रीय प्रवासी संगठन के हवाले से कहा कि पश्चिमी कोर्डोफन राज्य में बढ़ती असुरक्षा ने इस महीने खिवाई और नुहुद शहरों से लगभग 47,000 लोगों को वहां से बाहर निकलने पर मजबूर किया। इनमें से कई लोग पहले से ही आंतरिक रूप से विस्थापित थे और अब दूसरी बार पलायन करने को मजबूर हैं।उत्तरी दारफुर में पिछले सप्ताह ही अबू शौक शिविर और अल फशर शहर से लगभग 1,000 लोग विस्थापित हुए हैं जिससे इस महीने इन दो स्थानों से विस्थापित होने वाले लोगों की कुल संख्या 6,000 हो गई है।
प्रवक्ता ने कहा कि कुल मिलाकर उत्तरी दारफुर में 17 लाख से अधिक लोगों के विस्थापित होने का अनुमान है। इस बीच जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों ने संकट को और गहरा दिया है। उन्होंने कहा कि राजधानी खार्तूम के कुछ इलाकों में हैजे के मामलों में वृद्धि से संयुक्त राष्ट्र चिंतित है। खार्तूम में पिछले सप्ताह के दौरान पूरी तरह से बिजली गुल होने से स्थिति और भी जटिल हो गई है जो कथिततौर पर महत्वपूर्ण विद्युत के बुनियादी ढांचों पर ड्रोन हमलों के कारण हुई है।
इससे पानी और स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुँच बुरी तरह से बाधित हुई है।
उन्होंने कहा कि अब लोग असुरक्षित जल स्रोतों का सहारा ले रहे हैं जिससे जलजनित रोग फैलने का खतरा बढ़ रहा है। व्हाइट नाइल राज्य में ज़रूरत की चीजों की मांग बढ़ रही हैं क्योंकि पड़ोसी दक्षिण सूडान से काफी लाेग असुरक्षा और बिगड़ती स्थितियों के कारण वहां से भागकर यहां आ रहे हैं। श्री दुजारिक ने संयुक्तराष्ट्र शरणार्थी एजेंसी का हवाला देते हुए कहा कि पिछले छह हफ़्तों में 25,000 से ज़्यादा दक्षिण सूडानी शरणार्थी सुरक्षा की तलाश में व्हाइट नाइल पहुँच चुके हैं। इनमें ज्यादातर बच्चे और महिलांए शामिल हैं।
उन्होंने कहा,“भले ही मानवतावादी लोग ज़रूरतमंदो की सहायता के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हों, लेकिन हम ज़्यादा पहुँच और लचीली वित्तीय सहायता की तत्काल ज़रूरत पर ज़ोर देते हैं”। उन्होंने कहा कि आज तक इस साल मानवीय प्रतिक्रिया योजना के लिए सिर्फ़ 55 करोड़ बीस लाख डॉलर की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है जबकि जरूरत 4.2 अरब डॉलर की है।

