सागर: ड्रोन टेक्नोलॉजी अब खेती की तस्वीर बदल रही है,और इसके केंद्र में हैं ‘ड्रोन दीदी’ वे महिलाएं जो अब खेती में तकनीकी क्रांति की अगुवा बन चुकी हैं। केंद्र सरकार की ‘नमो ड्रोन दीदी योजना’ के तहत मध्य प्रदेश में कई महिलाएं ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बन रही हैं।सागर जिले की पड़रिया निवासी साक्षी पांडे इस बदलाव की मिसाल हैं। उन्होंने इफको द्वारा ग्वालियर में दी गई 15 दिवसीय निःशुल्क ट्रेनिंग प्राप्त की और अब डेढ़ साल से खेतों में ड्रोन से कीटनाशक और नैनो यूरिया का छिड़काव कर रही हैं। इस योजना के तहत उन्हें ड्रोन, इलेक्ट्रिक व्हीकल और जनरेटर भी निःशुल्क दिए गए।
साक्षी बताती हैं कि ड्रोन से छिड़काव न सिर्फ सस्ता और समय की बचत वाला है, बल्कि पानी की खपत भी काफी कम करता है। जहां हाथ से एक एकड़ में 80-90 लीटर पानी लगता है, वहीं ड्रोन सिर्फ 12 लीटर में काम कर देता है। इसके साथ ही फसल को कोई नुकसान भी नहीं होता।ड्रोन दीदी किसानों को पारंपरिक दानेदार यूरिया की जगह नैनो फर्टिलाइज़र के उपयोग के लिए जागरूक करती हैं, जो मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखता है और उत्पादन भी बेहतर करता है।
प्रति एकड़ छिड़काव के लिए ड्रोन दीदी को 200-300 रुपये मिलते हैं, जिससे वे हर महीने 20-25 हजार रुपये तक कमा रही हैं। किसान ‘किसानोदय’ ऐप के माध्यम से इनसे संपर्क कर सकते हैं। साक्षी जैसी महिलाएं अब न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और टिकाऊ खेती को भी मजबूती दे रही हैं।
