
मुंबई, 22 मई (वार्ता) बाजार अनुसंधान एवं परामर्श सेवा फर्म केयरएज का अनुमान है कि 31 मार्च को समाप्त पिछले वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वार्षिक आधार पर 6.8 प्रतिशत रह सकती है।
इसी आधार पर रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2024-25 में जीडीपी की वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है।
वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही के लिए गुरुवार को जारी केयरएज इकोनॉमिक मीटर (सीईएम) रिपोर्ट में कहा गया है कि आलोच्य तिमाही में सीईएम में सालाना आधार पर 3.0 प्रतिशत ऊंचा रहा, जबकि तीसरी तमाही (अक्टूबर-दिसंबर, 2024) में सीईएम में 2.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी थी।
इस आधार पर रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही में सालाना आधार पर जीडीपी की वृद्धि 6.8 प्रतिशत तथा पूरे वित्त वर्ष के जीडीपी वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह केयरएज के पहले के अनुमान से कम है। पहले इसने चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था।
सरकार के दूसरे अग्रिम अनुमान में चौथी तिमाही की जीडीपी वृद्धि 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है।
केयरएज का अनुमान है कि मार्च, 2025 की तिमाही में सकल मूल्य वर्धन (जीडीपी में से उत्पादों पर लगे शुद्ध कर को निकाल कर प्राप्त माल एवं सेवाओं का कुल मूल्य) सालाना आधार पर 6.5 प्रतिशत रह सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में पूंजीगत व्यय मजबूत रहा। इसका असर चौथी तिमाही की वृद्धि पर दिखेगा। कृषि, होटल एवं परिहन तथा निर्माण क्षेत्र में काम-काज की मजबूती से भी चौथी तिमाही में जीडीपी को बल मिलने का अनुमान है। इस दौरान प्रयागराज महाकुंभ से पर्यटन एवं परिवहन क्षेत्र को प्रोत्साहन मिला था।
रिपोर्ट के अनुसार चौथी तिमाही में कुल मिला कर उपभोग भी मजबूत दिखता है। उपभोग को ग्रामीण क्षेत्र की मांग से समर्थन मिला है लेकिन शहरी मांग पर निगाह रखने की जरूरत है।
केयरएज का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्र में मांग में सुधार, कर भार में कमी, नीतिगत ब्याज दर में कटौती, मुद्रास्फीति में गिरावट और मानसून अच्छा रहने की संभावना से आने वाले महीनों में आर्थिक गतिविधियों में अधिक सुधार होने की
उम्मीद है।
केयरएज का मानना है कि आर्थिक वृद्धि दर में तेजी के लिए उपभोक्ता मांग में मजबूत सुधार बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि तभी कंपनियां पूंजी निवेश में कोई वृद्धि करने को प्रेरित होती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक परिदृश्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है और इस समय को देखते हुए वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी वृद्धि सालाना आधार पर 6.2 प्रतिशत तक रह सकती है।
रिपोर्ट में 2024-25 की चौथी तिमाही में कृषि क्षेत्र की वृद्धि छह प्रतिशत, उद्योग क्षेत्र पांच प्रतिशत और सेवा क्षेत्र की वृद्धि 7.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। पूरे वित्त वर्ष के लिए इन क्षेत्रों की वृद्धि क्रमश: 4.5 प्रतिशत, 5.4 प्रतिशत और 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
जनवरी – मार्च 2025 की तिमाही में उपभोग में 6.8 प्रतिशत, निवेश में 6.9 प्रतिशत और सरकारी खर्च में सालाना आधार पर 7.3 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है।
पूरे वित्त वर्ष 2024-25 में उपभोग में 6.8 प्रतिशत, निवेश में 6.3 प्रतिशत और सरकारी खर्चों में 4.7 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।
