
अनूपपुर। जिले में पिछले 51 दिनों से हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। छत्तीसगढ़ सीमा से आए तीन हाथियों का दल लगातार गांव-गांव घूमकर ग्रामीणों के घरों और फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। मंगलवार रात एक दंत वाला नर हाथी सेंदुरी–बेलापार–भगतबांध होते हुए खांडा गांव पहुंच गया, जहां उसने चार कच्चे मकानों में तोड़फोड़ कर घरों में रखी खाद्य सामग्री खा ली और खेतों में लगी गेहूं, अरहर, गन्ना व केला की फसलों को रौंदकर भारी नुकसान पहुंचाया।हाथी ने ग्राम खांडा निवासी शंकर राठौर, राम सिंह, हीरामन पाव और सोनू सिंह पाव के मकानों को क्षतिग्रस्त किया। वहीं सीताराम राठौर और अन्य किसानों की खड़ी फसलें बर्बाद कर दीं। बुधवार सुबह हाथी खांडा बांध के ऊपर जंगल में विश्राम करता देखा गया।
इधर, दो अन्य हाथियों का दल जैतहरी वन परिक्षेत्र के धनगवां बीट के जंगल में पिछले 10 दिनों से डेरा डाले हुए है। हालांकि वे जंगल से बाहर नहीं निकले हैं, लेकिन ग्रामीणों में हर पल भय का माहौल बना हुआ है।
*रात में 8-10 किमी तक भटक रहा हाथी, अचानक गांवों में दे रहा दस्तक*
ग्रामीणों के अनुसार हाथी रात के समय लंबी दूरी तय कर अचानक गांव में प्रवेश कर जाता है। भगाने पर आक्रामक होकर चिंघाड़ता है और दौड़ाने लगता है, जिससे लोगों की जान खतरे में पड़ रही है। कई परिवार रात भर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं।
प्रशासन की निगरानी, पर ठोस समाधान नहीं
वन एवं पुलिस विभाग द्वारा अलर्ट जारी कर लोगों को सतर्क रहने की अपील तो की जा रही है, लेकिन हाथियों को सुरक्षित तरीके से खदेड़ने या स्थायी समाधान की दिशा में कोई प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
कलेक्टर हर्षल पंचोली के निर्देश पर राजस्व विभाग नुकसान का सर्वे कर रहा है, परंतु ग्रामीणों का कहना है कि केवल सर्वे से समस्या हल नहीं होगी, त्वरित राहत और सुरक्षा जरूरी है।
*जिला पंचायत अध्यक्ष ने जताई नाराजगी*
जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती प्रीति रमेश सिंह ने गांव पहुंचकर हालात का जायजा लिया और प्रशासन से तत्काल ठोस कार्रवाई की मांग की।“लगातार 50 दिनों से ग्रामीण दहशत में जी रहे हैं। घर टूट रहे हैं, फसलें नष्ट हो रही हैं। केवल सर्वे से काम नहीं चलेगा। प्रशासन को हाथियों की सुरक्षित मॉनिटरिंग, तत्काल राहत राशि और स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे ताकि आमजन को राहत मिल सके।”
ग्रामीणों की मांग
त्वरित मुआवजा भुगतान
रात्रिकालीन गश्त और वन अमले की तैनाती
हाथियों को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर खदेड़ने की व्यवस्था
प्रभावित परिवारों को अस्थायी राहत
लगातार बढ़ते हाथी आतंक ने प्रशासन की तैयारी और आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो किसी बड़ी जनहानि से इंकार नहीं किया जा सकता।
