जबलपुर: ओबीसी वर्ग का उप वर्गीकरण करने की मांग को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत व जस्टिस विवेक जैन की खंडपीठ ने केन्द्र सरकार के सामाजिक न्याय विभाग, ओबीसी कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव, राष्ट्रीय व मप्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।
जबलपुर निवासी रागिनी कश्यप की ओर से अधिवक्ता एसके कश्यप ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि ओबीसी का उप वर्गीकरण नहीं होने से अति पिछड़े लोगों को न्यायपालिका, विधायिका व कार्यपालिका में प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1992 में सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी के मामले में फैसला दिया था कि क्रीमी लेयर से ऊपर वालों को ओबीसी का लाभ नहीं मिलेगा।
इसी तरह शीर्ष अदालत ने यह कहा था कि इस वर्ग का उप वर्गीकरण होना चाहिए। इसके तहत ओबीसी को पिछड़ा, अधिक पिछड़ा और अति पिछड़ा में वर्गीकृत किया जाना था। याचिका में कहा गया कि मप्र की सूची क्रमांक-12 में अति पिछड़े वर्ग में केवट, कहार, मल्लाह, भोई, रैकवार, कश्यप, सौंधिया आदि का मध्यप्रदेश में प्रतिनिधित्व शून्य है। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।
