भाजपा को अध्यक्ष पद कब्जाने की उम्मीद जगी

मालवा- निमाड़ की डायरी

संजय व्यास

ढाई दशक से झाबुआ जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर कांग्रेस का कब्जा है. इस दौरान प्रदेश में भाजपा की सरकार रहने के बावजूद निकाय में अध्यक्षी से दूर होना भाजपा को सालती रही है. पूर्व में कांग्रेस समर्थित जामसिंह अमलियार जिपं अध्यक्ष रहे और इसके बाद दो दशक कांग्रेस की दिग्गज नेत्री स्व कलावती भूरिया जिला पंचायत अध्यक्ष रही. यह वह दौर रहा जब भाई वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कांतिलाल भूरिया की क्षेत्र में तूती बोलती थी. 2022 के चुनाव में मौका आया पर फिर जिला पंचायत की सत्ता भाजपा के हाथ से फिसल गई.

इस चुनाव में मुकाबला कांटे का रहा व 14 वार्डों में से कांग्रेस-भाजपा दोनों के 6-6 सदस्य चुने गए, 2 निर्दलियों ने बाजी मारी. एक जयस समर्थित तथा एक कांग्रेस के ही बागी विजेता के कांग्रेस को समर्थन देने से सोनल भाबर जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गईं. लेकिन हाल के घटनाक्रम में भाजपा की अध्यक्ष पद कब्जाने की उम्मीद जगी है. जिले में राजनीतिक उठापटक के बीच कांग्रेस समर्थित दो सदस्यों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने से जिले का राजनीतिक माहौल गर्मा गया है और इस कारण अब जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट का समीकरण भी बिगडऩे की कगार पर है.

सूत्रों के अनुसार जहां वार्ड क्र. 5 के विजय भाबर और वार्ड क्र. 11 से ममता बहादुर हटीला ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है और अब इस प्रकार भाजपा के पास पूर्व में 6 सदस्य थे और 2 नए सदस्य जुड़ जाने पर कुल 8 सदस्य हो गए हैं, वहीं 2 सदस्यों के कांग्रेस छोडऩे से कांग्रेस के सदस्यों की संख्या 6 हो गई है. इस प्रकार समीकरण लगभग बदल चुका है. भाजपा समर्थित 8 सदस्यों ने वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष सोनल भाबर और उपाध्यक्ष अकमाल मालू डामोर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव इंदौर कमिश्नर के समक्ष प्रस्तुत किया है और संभवत: इस अविश्वास प्रस्ताव को लेकर 15 तारीख को वोटिंग होने की बात कही जा रही है.

अपना दल की नीमच-मंदसौर में सक्रियता

अंचल में आम आदमी पार्टी, बसपा, एआईएमआईएम, भारतीय आदिवासी पार्टी की बढ़ती गतिविधियों के बीच अब उत्तर प्रदेश के एक क्षेत्रीय दल का नाम भी जुड़ गया है. दलित, पिछड़े वर्ग की राजनीति कर रहे अपना दल (एस) ने नीमच-मंदसौर के गुर्जर बहुल इलाके में सक्रियता बढ़ाने के लिए चुना है. इसकी राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल हैं. विगत माह ही नीमच में अपना दल (एस) की बैठक राष्ट्रीय महासचिव (युवा मंच) डॉ. अखिलेश पटेल और रणनीति कार अतुल मलिकराम के मार्गदर्शन में आयोजित की गई. बैठक में हजारों की संख्या में नए सदस्यों को सदस्यता दिलाई गई, तथा एक जोनल कार्यालय का भी शुभारम्भ किया गया. बैठक में मुख्य रूप से संगठन विस्तार, आगामी रणनीतियों और जनसंपर्क अभियान पर भी विस्तृत चर्चा की गई.

विश्वा पर उंगली उठाने में किसका डर ?

खंडवा में लगभग 400 करोड़ रुपए नर्मदा जल पाइपलाइन में तथाकथित भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए? किस्तों में ये रुपए लिए गए. हर पांच से 10 दिन में लाइन फूट रही है. सरकार का लगभग पूरा पैसा सफाचट हो चुका है. विश्वा नाम की कंपनी से लोगों का विश्वास उठ चुका है. 10 साल में 300 बार लाइन फूट गई, पर कंपनी का कोई भी बाल बांका नहीं कर पाया. जो भी कलेक्टर आए उन्होंने कंपनी की लापरवाही की पहले दिन खिलाफत की, दूसरे दिन चुप बैठ गए. वर्तमान कलेक्टर ने कहा था कि अब यदि लाइन फूटी तो वह कंपनी पर एफआईआर करवाएंगे, लेकिन एक महीने में ही 10 बार लाइन फूट गई और कलेक्टर कुछ भी नहीं कर पाए.

इससे पहले भी पाइपलाइन पर विवाद होते रहे हैं. शहर मोटी रकम खर्च करने के बाद भी प्यासा है. एक लाइन डाल दी गई. इसकी बिना जांच के ही फाइल दफन हो गई. कंप्यूटर जिनमें कंपनी का रिकॉर्ड था, वह भी चोरी हो गया. लोगों से 200 रुपए महीना बिल नियमित लिया जा रहा है, लेकिन पानी के लिए आज भी हाहाकार मचा है. अब दूसरी लाइन 200 करोड़ रुपए में फिर डाली जा रही है. पिछली लाइन का कोई हिसाब नहीं है. इसमें किसने भ्रष्टाचार किया, यह बताने की हिम्मत किसी में नहीं है. चर्चा तो यह है कि 10 साल पहले आई यह कंपनी एक बड़े भाजपाई नेता के छद्म नाम से है. ये नेता दक्षिण भारत की राजनीति करते हैं, जिन पर उंगली उठाने से बड़े नेता भी डरते हैं.

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