दिल्ली डायरी
प्रवेश कुमार मिश्र
पुलवामा आतंकवादी घटना के बाद भारतीय सेनाओं द्वारा आपरेशन सिंदूर के तहत जिस तरह से पाकिस्तान में पल रहे आतंकवादी संगठनों के केन्द्र पर सटीक हमला किया गया था उसकी चौतरफा तारीफ हुई है. पक्ष और विपक्ष के साथ-साथ संपूर्ण राष्ट्र ने जिस तरह से इस सैन्य कार्रवाई के पक्ष में अपना समर्पण युक्त भावना उजागर किया उससे भारत की साहस, अखंडता व संप्रभुता विश्व के सामने एक अतुलनीय उदाहरण के रूप में स्थापित हुई. जिस तरह से भारतीय सैनिकों ने आपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया वह भारतीय सैन्य ताकत का बेहतरीन उदाहरण के रूप में हमेशा याद किया जाएगा. दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में भी आपरेशन सिंदूर की सफलता को अन्य आपरेशन की तुलना में सबसे प्रभावशाली और परिणामदायी कहा जा रहा है.
निशाने पर आई सरकार
पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए भारतीय सैन्य कार्रवाई में जिस तरह से लगातार सफलता प्राप्त हो रही थी उसके कारण आम जनता के बीच जहां एक तरफ मोदी सरकार की सख्त नीतियों की जबरदस्त चर्चा हो रही थी वहीं दूसरी ओर तकनीकी संपन्न भारतीय सैन्य रणनीतिकारों को लेकर भी चर्चा खूब हुई. भारतीय आम लोग भी इस सफल युद्ध संचालन के सुखद और अनपेक्षित परिणाम के रूप में एकतरफा अपेक्षा पाल बैठे थे. देश एकदम राजनीतिक, सामाजिक और व्यवहारिक रूप से उत्साहित था लेकिन अचानक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से संघर्ष विराम की घोषणा ने सबको चौका दिया.
अचानक विपक्षी दलों के अलावा आम लोगों के निशाने पर सरकार की नीति आ गई. हालांकि संघर्ष विराम की जरूरत को लेकर सत्ताधारी दल के प्रवक्ताओं और सरकार के पक्षकारों ने तर्कसंगत संदेश देने का प्रयास किया लेकिन आज भी आम लोगों के मन में सवाल खड़ा है. सोशल मीडिया और आम बातचीत में भी एकबार फिर दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सख्त नीतियों की तुलना करते हुए विशेषज्ञों ने भी मोदी सरकार को एक झटके में कठघरे में खड़ा कर दिया. लोग इसे जीती बाजी हारने के जैसे उपमाओं से नवाज कर विदेशी हस्तक्षेप के लिए सरकार की नीति पर सवाल उठा रहे हैं.
ताकतवर भारत का संदेश
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पाकिस्तान के साथ युद्ध विराम की घोषणा के दो दिन बाद दिए गए राष्ट्र के नाम संदेश जहां एक तरफ करूणा के भाव से प्रेरित था वहीं दूसरी ओर सख्ती के भाव के साथ चौकन्ना प्रहरी के रूप में सरकार को स्थापित करने का प्रयास था. मोदी ने अपने सख्त अंदाज में पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ-साथ पूरे विश्व को भी नए दौर के भारत और ताकतवर भारत के बुनियादी ताकत से रूबरू कराने का प्रयास था. दिल्ली की राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मोदी ने अपने एक एक शब्द में भारतीयों की भावना को समाहित करते हुए सार्वभौमिक संदेश दिया है.
डबल एम पर राजद की नजर
बिहार विधानसभा चुनाव में जहां एक तरफ राजग खेमा सभी वोटरों को साधने के लिए ब्लाक स्तर की तैयारी में जुटा है जबकि दूसरी ओर महागठबंधन को नेतृत्व प्रदान कर रहे राजद के रणनीतिकार की डबल एम यानी महिला और मुस्लिम वोटों पर नजर है. चर्चा है कि राजद रणनीतिकारों ने एक सोची समझी रणनीति के तहत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को महिला विरोधी नेता के रूप में पेश कर इस वर्ग विशेष को अपने पक्ष में करने की तैयारी आरंभ कर दी है. पोस्टरवार और व्यवहारिक परिचर्चा में नीतीश कुमार पर ही निशाना साधने की रणनीति बनाई है
