
भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस ने मंगलवार को निर्वाचन आयोग और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोलते हुए इस निर्णय को लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक सिद्धांतों पर सीधा प्रहार बताया। पार्टी ने मामले को न्यायालय में चुनौती देने तथा राजनीतिक और कानूनी लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया है।
भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित संयुक्त पत्रकार वार्ता में प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, राज्यसभा सांसद अशोक सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य कमलेश्वर पटेल तथा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन मौजूद रहे।
हरीश चौधरी ने कहा कि इस घटनाक्रम ने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र और संविधान का अपमान है तथा कांग्रेस न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखेगी।
जीतू पटवारी ने भाजपा पर महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव से जुड़े घटनाक्रम ने भाजपा की वास्तविक सोच को उजागर कर दिया है। उन्होंने नामांकन निरस्तीकरण को प्रदेश के लोकतांत्रिक इतिहास का काला अध्याय बताते हुए बुधवार को कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा उपवास रखने की घोषणा की।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दावा किया कि भाजपा को पहले से पता था कि चुनाव में कांग्रेस को 62 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायकों में टूट की अफवाहें फैलाने के प्रयास किए गए और जब पार्टी एकजुट रही तो नामांकन पर आपत्तियां खड़ी की गईं।
मीनाक्षी नटराजन ने आरोप लगाया कि पर्याप्त संख्या न होने के बावजूद भाजपा द्वारा तीसरा राज्यसभा प्रत्याशी उतारना लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करने की कोशिश थी। उन्होंने कहा कि पहले जिस कानूनी नोटिस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया, बाद में उसी को उनके नामांकन को चुनौती देने का आधार बनाया गया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल एक प्रत्याशी की नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान के भविष्य की है।
वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता ने कहा कि रिटर्निंग अधिकारी का आदेश स्थापित कानूनी सिद्धांतों के विपरीत है। उनके अनुसार हैदराबाद न्यायालय का नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 223 के तहत जारी किया गया था, जो केवल पक्ष रखने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि मीनाक्षी नटराजन को किसी भी आपराधिक मामले में न तो आरोपी घोषित किया गया है और न ही तलब किया गया है। वहीं वरिष्ठ कांग्रेस नेता जे.पी. धनोपिया ने दावा किया कि नामांकन से संबंधित सभी अनिवार्य दस्तावेज विधिवत प्रस्तुत और सत्यापित किए गए थे।
कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह इस फैसले को अदालत में चुनौती देगी और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर अभूतपूर्व हमले के खिलाफ अपना राजनीतिक अभियान जारी रखेगी।
