डीडीए करेगा विधानसभा को धरोहर स्थल बनने में हरसंभव मदद: सक्सेना

नयी दिल्ली 12 मई (वार्ता) दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा है कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) विधानसभा को धरोहर स्थल घोषित करने के प्रयासों में पूरा सहयोग देगा।
श्री सक्सेना और विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सोमवार को विधानसभा परिसर में 500 किलोवाट सौर ऊर्जा संयंत्र की आधारशिला रखी। श्री सक्सेना ने कहा, “आज रखी गई यह आधारशिला सिर्फ एक सौर संयंत्र के लिए नहीं, बल्कि स्वच्छ और हरित भविष्य के लिए है, जो जिम्मेदार शासन की नींव है।”
उन्होंने बताया कि संयंत्र की क्षमता 200 किलोवाट से बढ़ाकर 500 किलोवाट की गई है, जो स्थान और तकनीकी सीमाओं के बावजूद संभव हुआ-यह दिल्ली की नए स्वरूप और निरंतर विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि डीडीए विधानसभा को धरोहर स्थल घोषित करने के प्रयासों में पूरा सहयोग देगा। उन्होंने कहा, “मैंने पहले भी विधानसभा का दौरा किया है, इसकी समृद्ध विरासत की रक्षा करना मेरा उद्देश्य है।”
श्री सक्सेना ने विधानसभा अध्यक्ष को इस पहल को साकार करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए बधाई दी और उनके सक्रिय दृष्टिकोण और सतत विकास के प्रति समर्पण की सराहना की।
श्री गुप्ता ने विधानसभा के आधुनिकीकरण और निरंतर विकास से जुड़ी पहलों की जानकारी दी, जिनमें विधानसभा पुस्तकालय का डिजिटलीकरण, नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन (नेवा), लाइट एंड साउंड शो और बुनियादी ढांचे का नवीनीकरण शामिल है, ताकि विधानसभा को धरोहर के रूप में संरक्षित किया जा सके।
इसका मुख्य आकर्षण सौर ऊर्जा परियोजना है, जिससे हर महीने लगभग 15 लाख की बिजली की बचत होगी। अतिरिक्त बिजली उत्पादन के कारण यह मॉडल राजस्व उत्पन्न करने वाला भी बन सकता है। इस बचत से न केवल सौर ऊर्जा उपकरणों की लागत की भरपाई होगी, बल्कि विधानसभा की दीर्घकालिक विद्युत आवश्यकताएं भी पूरी होंगी, जिससे बिजली बिल शून्य हो जाएंगे।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि यह परियोजना न केवल पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाएगी, बल्कि जनता को भी सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि दिल्ली के लोग भी सौर ऊर्जा को अपनाएंगे ।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस अवसर पर कहा कि यह पहल पीएम-सूर्य घर योजना के अनुरूप है, जिससे दिल्ली देश की पहली ऐसी विधानसभा बनेगी, जो पूरी तरह अक्षय ऊर्जा पर चलेगी। उन्होंने बताया कि दिल्ली की मौजूदा बिजली मांग लगभग 8,000 मेगावाट है, जो जल्द ही 9,000 मेगावाट तक पहुंच सकती है-ऐसे में सौर ऊर्जा पर निर्भरता इस बढ़ती मांग को सतत रूप से पूरा करने में मदद करेंगी।

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