मुंबई 08 मई (वार्ता) मुंबई की एक विशेष अदालत ने महाराष्ट्र में नासिक जिले के मालेगांव में हुए विस्फोटों के करीब 17 साल बाद गुरुवार को अपना फैसला आगामी 31 जुलाई तक टाल दिया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ए.के. लाहोटी ने पहले फैसले के लिए आज का दिन मुकर्रर किया था,लेकिन न्यायिक प्रक्रिया के कारण उन्होंने इसे 31 जुलाई तक टाल दिया।
इस मौके पर अदालत के समक्ष भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पूर्व सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर, पूर्व सैन्य खुफिया अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित (सेवानिवृत्त), मेजर रमेश उपाध्याय (सेवानिवृत्त), अजय राहिरकर, समीर कुलकर्णी, सुधाकर चतुर्वेदी और सुधाकर धर द्विवेदी सहित मुकदमे में नामजद सभी सात आरोपी उपस्थित हुए।
उनतीस सितंबर- 2008 को रमजान के पवित्र महीने और नवरात्र उत्सव की पूर्व संध्या पर विस्फोटों में छह लोगों की मौत हो गयी थी और 100 अन्य घायल हुए थे।
शुरू में विशेष पुलिस महानिरीक्षक हेमंत करकरे के नेतृत्व में आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) द्वारा जांच की गई थी, जो 26/11 के आतंकवादी हमले के दौरान मारे गए थे।
एटीएस ने 2009 में आरोपपत्र दाखिल किया था, हालांकि बाद में मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को स्थानांतरित कर दिया गया। एनआईए ने 2016 में एक पूरक आरोपपत्र दाखिल किया।
एनआईए ने अपने आरोपपत्र में एटीएस जांच के साथ तालमेल बिठाया, लेकिन कुछ पहलुओं पर मतभेद रखते हुए महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत आरोपों को हटाने की सिफारिश की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
विशेष अदालत ने उन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाया है, जिनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए गए थे। अदालत ने 30 अक्टूबर-2018 को सात आरोपियों के खिलाफ कठोर यूएपीए और आईपीसी के तहत आरोप तय किए।
