पंजीकृत डाक एक सितम्बर से होगी बंद, स्पीड पोस्ट में होगा विलय

फगवाड़ा, 11 अगस्त (वार्ता) भारतीय डाक सेवा अपनी सबसे स्थायी सेवाओं में से एक को अलविदा कह देगी, क्योंकि एक सितंबर, 2025 से 50 साल पुरानी पंजीकृत डाक सेवा बंद हो जायेगी और इसका विलय तेज़ और तकनीकी रूप से उन्नत स्पीड पोस्ट नेटवर्क के साथ हो जायेगा।

डाक संचालन को तेज़, आधुनिक और पूरी तरह से ट्रैक करने योग्य बनाने के उद्देश्य से किये गये इस कदम का मतलब है कि पहले पंजीकृत डाक द्वारा भेजे जाने वाले सभी पत्र और पार्सल अब स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजे जायेंगे। डाक विभाग के अनुसार, यह निर्णय डिजिटल संचार के तेज़ी से बढ़ते चलन और निजी कूरियर कंपनियों की बढ़ती संख्या के कारण पंजीकृत डाक की घटती मांग के बीच लिया गया है। पंजीकृत और स्पीड पोस्ट, दोनों को एक साथ चलाने से लागत भी बढ़ गयी थी। स्पीड पोस्ट, जिसे ज़्यादा कुशल माना जाता है, रीयल-टाइम ट्रैकिंग, डिजिटल भुगतान और बीमा सुविधायें प्रदान करता है- ये सुविधायें पंजीकृत डाक में नहीं थीं। यह परिवर्तन हालांकि एक महत्वपूर्ण आधुनिकीकरण कदम है, लेकिन इसका असर ग्रामीण क्षेत्र के निवासियों और निम्न-आय वर्ग पर भी पड़ने की आशंका है, जिनके लिए पंजीकृत डाक एक अधिक किफायती विकल्प था।

फगवाड़ा के पोस्ट मास्टर प्रीतपाल सिंह ने सोमवार को बताया कि सरकारी विभागों, न्यायालयों और संस्थानों को एक सितंबर तक स्पीड पोस्ट का उपयोग करने का निर्देश दिया गया है। जनता के लिए पंजीकृत डाक का उपयोग करने की अंतिम तिथि 30 अगस्त, 2025 होगी, क्योंकि रविवार, 31 अगस्त को डाकघर बंद रहेंगे।

फिल्लौर में पोस्ट मास्टर योगेश ठाकुर ने पुष्टि की कि उन्नत डाक प्रौद्योगिकी पहल के तहत, पंजीकृत डाक प्रणाली को सितंबर से स्पीड पोस्ट की संरचना में विलय कर दिया जायेगा। यह बदलाव एक ऐसी सेवा के युग के अंत का संकेत है, जिसे लंबे समय से अपनी विश्वसनीयता, किफ़ायतीपन और कानूनी मान्यता के लिए, खासकर दफ्तर जाने वालों और संस्थानों के बीच, महत्व दिया जाता रहा है। कई लोगों के लिए, यह उस समय की याद भी ताज़ा करता है जब चिट्ठियां शहरों के बीच भावनाओं का संचार करती थीं और डाकिये का रोज़ाना आना एक उत्सुकता भरी घटना हुआ करती थी।

भारतीय डाक विभाग जैसे-जैसे तेज़ और डिजिटल रूप से एकीकृत भविष्य की ओर बढ़ रहा है, इसके इतिहास के सबसे यादगार अध्यायों में से एक का पर्दा चुपचाप गिर रहा है, यह याद दिलाता है कि भले ही अब संचार तुरंत हो जाता है,

लेकिन डाक टिकट लगे लिफाफे का आकर्षण और उसके आने का इंतज़ार अब बीते ज़माने की बात हो गयी है।

 

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