अनुशासनहीनता पर मुसीबत में देवास महापौर गीता अग्रवाल

मालवा- निमाड़ की डायरी

संजय व्यास

जनप्रतिनिधियों के कार्य में पति के हस्तक्षेप और मनमानी का खामियाजा देवास महापौर गीता अग्रवाल को भुगतना पड़ सकता है. नगर निगम में पिछले दिनों परिषद की बैठक में महापौर गीता अग्रवाल के पति महापौर प्रतिनिधि दुर्गेश अग्रवाल से एमआईसी सदस्य रामदयाल यादव और अजय तोमर के बीच राजनीतिक विवाद हो गया था. इसके बाद देवास में यह राजनीतिक विवाद गरमा गया और महापौर पति इन दो एमआईसी सदस्यों को हटाने पर उतारू हो गए. परिणामस्वरूप महापौर गीता दुर्गेश अग्रवाल ने मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1956 के अंतर्गत मिले अधिकारों का उपयोग करते हुए अपनी ही पार्टी भाजपा के उक्त सदस्यों को हटा दिया और उनकी जगह दो महिलाओं को सदस्य बना दिया था.

इसे पार्टी नेतृत्व ने गंभीरता से लिया और घोर अनुशासनहीनता माना. हाल ही में अनुशासन हीनता, पार्टी की गाइडलाइन से हटकर मनमानी करने वाले जनप्रतिनिधियो की क्लास लेने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा, प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह और संगठन महामंत्री हितानंद ने भोपाल बुलाया था. इनमें देवास महापौर गीता अग्रवाल भी शामिल थीं, लेकिन उन्होंने इसकी भी अवहेलना कर दी व भोपाल पहुंची ही नहीं. इस बात पर प्रदेश नेतृत्व ने गहरी नाराजगी प्रकट की है. उनका मानना है कि मनमर्जी से एमआईसी सदस्यों को हटाना घोर अनुशासन हीनता है. अब आगे देखते हैं प्रदेश नेतृत्व गीता अग्रवाल के खिलाफ क्या एक्शन लेता है.

माने के समक्ष एकजुटता बड़ी चुनौती

बुरहानपुर भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज माने को पार्टी द्वारा फिर भरोसा जताते हुए दूसरा कार्यकाल दिए जाने के बाद जहां आगामी विधान सभा चुनाव 2028 के दृष्टिगत जिले के 52 बूथों को मजबूत करने, बूथ समितियों को सुदृढ़ करने और अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में वोटिंग प्रतिशत को बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक ले जाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को लेकर कार्यशील हैं, वहीं उनके सामने कार्यकर्ताओं में एकजुटता बनाए रखना बड़ी चुनौती है.

यहां सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल व विधायक तथा पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस के गुट कुछ अवसरों को छोड़ दें तो अक्सर अलग-थलग दिखाई देते हैं. दोनों गुटों की एक-दूसरे के कार्यक्रमों से दूरी चर्चा में बनी रहती हैं. लोक सभा चुनाव के इतर विधान सभा चुनाव के दौरान टिकट वितरण के समय यह गुटबाजी ज्यादा जोर पकड़ती है. माने को बूथ मजबूती और वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए कार्यकर्ताओं को सम्हाले रखने में कड़ा परिश्रम करना पड़ सकता है. उल्लेखनीय है कि माने अर्चना चिटनीस के नजदीक बताए जाते हैं.

अब मंजू दादू की दिलचस्पी बुरहानपुर में

विगत 4 बार से अर्चना चिटनिस बुरहानपुर विधान सभा चुनाव लड़ चुकी हैं, अब नई चुनौती नेपानगर विधायक मंजू दादू खड़ी कर सकतीं हैं. इन दिनों दादू अपना क्षेत्र छोडक़र बुरहानपुर में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहीं हैं. वे सांसद पाटिल गुट की मानी जातीं हैं और उनके समक्ष पैदा हो रही एंटी इनकंबेंसी के कारण कार्यकर्ताओं का पूर्व नेपा विधायक सुमित्रा कास्डेकर की ओर बढ़ता झुकाव उन्हें परेशान कर रहा है. इसीलिए मंजू दादू को बुरहानपुर में उम्मीद नजर आ रही है. सो वे अपना नया कार्यक्षेत्र बुरहानपुर विधानसभा को बना 2028 का चुनाव यहां ले लडऩा चाहतीं हैं. गत चुनाव में अर्चना चिटनीस को विधान सभा टिकट के लिए भारी विरोध का सामना करना पड़ था. अब मंजू दादू चुनौती पेश कर रही हैं

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