
जबलपुर। हाईकोर्ट ने एक मामले में कहा कि चश्मदीद गवाह और पुख्ता सबूत के अभाव में हत्या का अपराध साबित नहीं होता। जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस देवनारायण मिश्रा की युगलपीठ ने कहा कि केवल बेल्ट के एक टुकड़े को परिस्थितिजन्य साक्ष्य मानकर सजा नहीं दी जा सकती। उक्त मत के साथ युगलपीठ ने अपीलार्थी की उम्रकैद निरस्त कर उसे रिहा करने के निर्देश दिये है।
दरअसल नरसिंहपुर निवासी कन्हैयालाल नौरिया की ओर से अधिवक्ता प्रेमेन्द्र सेन ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि बरमान पुलिस चौकी में 2 फरवरी को कोसाबाई के गुम होने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। ढूंढऩे पर उसकी लाश मिली। मृतका के पति लेखराम चौधरी ने बताया कि उसकी पत्नी बकरियां चराने गई थीं। उसकी गला दबाकर हत्या कर दी गई और बकरियां भी चुरा ली गईं। मृतका के पास से एक बेल्ट का टुकड़ा मिला, जोकि कन्हैयालाल का बताया गया। दलील दी गई कि न तो कन्हैया के पास से गुमी हुई बकरियां मिलीं और न ही बेल्ट का दूसरा टुकड़ा मिला। मामले में कोई चश्मदीद गवाह भी नहीं है। पुलिस ने केवल परिस्थितियों के आधार पर प्रकरण दर्ज किया था। पूरे मामले का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने सजा निरस्त कर दी।
