यश पाठक
भोपाल: शहर के सौंदर्यीकरण के नाम पर नगर निगम द्वारा विभिन्न चौराहों पर स्थापित की गई कलाकृतियाँ अब अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही हैं। रोशपुरा चौराहे पर स्थापित रेडियो की कलाकृति जो कभी शहर की रचनात्मकता और नवाचार का प्रतीक हुआ करती थी, आज कचरे और उपेक्षा का शिकार होकर अपनी पहचान खो रही है। कुछ समय पहले, नगर निगम ने शहर को एक नया और आकर्षक रूप देने के उद्देश्य से विभिन्न चौराहों पर वेस्ट मटेरियल (कचरा सामग्री) का उपयोग करके कलाकृतियाँ स्थापित करने की एक सराहनीय पहल की थी।
इस पहल के तहत, रोशनपुरा चौराहे पर एक विशाल रेडियो की कलाकृति लगाई गई थी, जिसे पुराने टायर, लोहे के टुकड़े और अन्य बेकार पड़ी वस्तुओं से बनाया गया था। यह कलाकृति न केवल रचनात्मकता का एक उत्कृष्ट उदाहरण थी, बल्कि इसने लोगों को रीसायकल और कचरे के सदुपयोग के महत्व के बारे में भी जागरूक किया था। उस समय, इस कलाकृति को देखने के लिए काफी लोग रुकते थे.और यह शहर के लिए एक नया आकर्षण का केंद्र बन गई थी।
लेकिन बाद के दिनों में इस कलाकृति की हालत दिन-ब-दिन खराब होती चली गई। आज, यह रेडियो अपनी चमक खो चुका है। इसके विभिन्न हिस्से टूट गए हैं, रंग फीका पड़ गया है और यह धूल और गंदगी से बुरी तरह से सना हुआ है। आसपास के लोग बताते हैं कि काफी समय से इसकी मरम्मत या सफाई नहीं की गई है। कलाकृति के आसपास कचरा जमा रहता है।
रोशपुरा चौराहे पर रेडियो की कलाकृति की यह दुर्दशा कोई अकेली घटना नहीं है। शहर के अन्य प्रमुख चौराहों पर भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिल रही है। चाहे वह एमपी नगर का कोई चौराहा हो, या फिर न्यू मार्केट क्षेत्र, अधिकांश जगहों पर स्थापित कलाकृतियाँ या तो क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं या फिर उचित रखरखाव के अभाव में अपनी सुंदरता खो चुकी हैं। कई जगहों पर तो कलाकृतियों के आसपास झाडिय़ाँ उग आई हैं और वे पूरी तरह से अनदेखी का शिकार हो गई हैं। जब इन कलाकृतियों को स्थापित किया गया था, तो इनका उद्देश्य शहर को एक विशिष्ट पहचान देना और लोगों को कला के प्रति आकर्षित करना था।
लेकिन, उचित रखरखाव के बिना, यह उद्देश्य पूरी तरह से विफल होता दिख रहा है। इन कलाकृतियों पर खर्च किया गया लाखों रुपये अब व्यर्थ होता नजर आ रहा है। जरूरी है कि नगर निगम भविष्य में जब भी कोई नई कलाकृति स्थापित करे, तो उसके दीर्घकालिक रखरखाव की योजना भी पहले से ही तैयार करे। ऐसा न होने पर, इन कलाकृतियों का भी वही हाल होगा जो आज रोशनपुरा के रेडियो और शहर के अन्य चौराहों की कलाकृतियों का हो रहा है
