ग्वालियर चंबल डायरी
हरीश दुबे
ग्वालियर सीट से दो दफा सांसद और सूबाई सरकार की कैबिनेट में कई दफा मंत्री रहते हुए उद्योग, वाणिज्य, खेल, तकनीकी शिक्षा जैसे वजनदार महकमे संभाल चुकीं यशोधरा राजे ने 2023 के विधानसभा चुनाव में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए खुद को चुनावी राजनीति से दूर कर लिया था। सिंधिया परिवार से घोर असहमति रखने वाले तमाम लोगों ने उस वक्त यह माना था कि तत्कालीन ग्वालियर रियासत की पूर्व राजकुमारी के सक्रिय राजनीति के सफर पर फिलहाल विराम लग गया है।
लेकिन बेबाक तेवरों के लिए पहचानी जाने वालीं यशोधरा चुप होकर बैठने वाली नेत्रियों में से नहीं हैं। हां, यह सच है कि यशोधरा की पिछले डेढ़ साल में सत्ता व संगठन में भूमिका या सक्रियता न के बराबर रही लेकिन राजे अब पुरानी फॉर्म में लौट रही हैं। यशोधरा ने राजमाता विजयाराजे की बतौर राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में भाजपा की राजनीति में प्रवेश किया था, तब ज्योतिरादित्य कांग्रेस में होते थे लेकिन अब बुआ और भतीजे एक ही पार्टी में हैं, इन हालात में यशोधरा को अब पार्टी में पुरानी हैसियत वापस हासिल कर मजबूत पहचान बनाने के लिए कुछ ज्यादा ही परिश्रम करना पड़ सकता है।
राजे ने अपनी लंबी चुप्पी तोड़ दी है और इस वक्त राजनीतिक हलकों में उनकी सोशल मीडिया पोस्ट्स की चर्चा और जनसमस्याओं को लेकर उठाई जा रही आवाज की खनक गूंज रही है। यशोधरा पिछले कुछ दिनों से अंचल की समस्याओं को उठा रही हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली से लेकर ग्वालियर के नीडम आरओबी जैसे विकास प्रोजेक्टों के लोकार्पण में लेतलाली जैसे मुद्दों पर उनकी विष्फोटक पोस्ट चर्चा में हैं। सवाल पूछे जा रहे हैं कि क्या यह सक्रियता उनकी वापसी का संकेत है अथवा भाजपा नेतृत्व को दी गई एक संतुलित चेतावनी है? ग्वालियर में भाजपा मूल और महल खेमों में बटी है, लिहाजा पार्टी में आए दिन खींचतान की स्थिति रहती है। इस सूरत में यशोधरा संवाद सेतु की भूमिका निभा सकती हैं क्योंकि वे मूल भाजपा और महल भाजपा दोनों खेमों पर असर रखती हैं।
भाजपा की मुख्यधारा में लौट रहे हैं राज चड्ढा
कभी अपनी ही पार्टी की सत्ता एवं संगठन के खिलाफ मुखर रहने वाले राज चड्ढा के सुर एकदम से बदल गए हैं। भाजपा में बुद्धिजीवी नेता की सोच रखने वाले राज चड्ढा इन दिनों अपने तेवरों के सर्वथा विपरीत और पार्टी नेताओं के प्रति सकारात्मक नजर आ रहे हैं। नीड़म आरओबी के उदघाटन के बाद पोस्ट कर उन्होंने जिस अंदाज में सीएम का शुक्रिया अदा किया और राजनीति में पुत्रवत कनिष्ठ हैसियत रखने वाले जिलाध्यक्ष की भी तारीफ की, उससे प्रतीत होता है कि भाजपा में अब परिस्थितियां चड्ढा के अनुकूल हैं एवं वे पार्टी में एक और पारी खेलने के लिए तैयार हैं।
चड्ढा 60 साल पुराने कार्यकर्ता होने के साथ मीसाबंदी भी हैं। वे 1962 से जनसंघ और भाजपा से जुड़े हैं। वे पार्टी की ग्वालियर इकाई के जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके अलावा भाजपा के टिकट पर उन्होंने ग्वालियर पूर्व से विधानसभा चुनाव भी लड़ा था जो कि वे हार गए थे। इसके बाद पार्टी ने उन्हें ग्वालियर मेला प्राधिकरण का अध्यक्ष भी बनाया था। करीब डेढ़ दशक से वे उपेक्षा का शिकार होकर पार्टी में किसी पद पर नहीं हैं और समय-समय पर भाजपा, कांग्रेस व अन्य राजनीतिक दलों के अलावा प्रशासनिक अफसरों के संबंध में फेसबुक पर पोस्ट करते रहे हैं।
करीब आठ साल पहले जिस सोशल मीडिया के सहारे सार्वजनिक रूप से बढ़ते भ्रष्टाचार लचर स्वास्थ्य व्यवस्था जैसे मुद्दे उठाने के कारण भाजपा ने इस वरिष्ठ नेता राज चड्ढा को निलंबित कर दिया था। उसी सोशल मीडिया के सहारे वे अपनी उपयोगिता सिद्ध करने में कामयाब रहे और दो साल पहले पार्टी नेतृत्व ने निलंबन समाप्त कर उन्हें फिर से पार्टी में वापस ले लिया था लेकिन तब भी उन्हें हाशिए पर ही रखा गया। अब उनके मुख्यधारा की राजनीति में वापसी के आसार बनते दिख रहे हैं।
प्रधानमंत्री को बुके भेंट करते फोटो खिंचाने की हसरत
इस समय ग्वालियर का जिला प्रशासन से लेकर पुलिस महकमा तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 11 अप्रैल के प्रस्तावित दौरे की दिन रात तैयारियों में जुटा है। हालांकि प्रधानमंत्री का ग्वालियर में अल्प प्रवास है लेकिन प्रशासन अपने तईं इंतजामात में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहता। प्रधानमंत्री इस दिन ग्वालियर के महाराजपुरा हवाईअड्डे आएंगे और यहां से अशोकनगर की ईसागढ़ तहसील स्थित आनंदपुर ट्रस्ट में मनाए जा रहे वैशाखी उत्सव में सम्मिलित होने रवाना होंगे। तैयारियों पर भोपाल की भी नजर है। खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ग्वालियर आने के बाद ईसागढ़ गए और तैयारियां देखीं।
चीफ सेक्रेट्री अनुराग जैन भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ग्वालियर मुख्यालय पर आला अधिकारियों से विस्तार से चर्चा कर चुके हैं।कलेक्टर रुचिका चौहान ने भी अफसरों की बैठक लेकर प्रधानमंत्री की यात्रा के मद्देनजर सुरक्षा के साथ ही अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में निर्देश दिए हैं। उधर भाजपा के स्थानीय नेता भी कुछ ज्यादा ही सक्रिय हैं। महाराजपुरा एयरपोर्ट पर मोदी से मुलाकात और उन्हें गुलदस्ता देते हुए फोटो खिंचाने की हसरत पूरी करने ये नेता अवसर और माध्यम तलाश रहे हैं। हालांकि इस सपने को पूरा करने में एसपीजी के सख्त नियम कायदे आड़े आ रहे हैं।
कांग्रेस के हाथ से एक बड़ा मुद्दा खिसका
पिछले आठ साल से नीडम आरओबी के लोकार्पण का इंतजार तब पूरा हुआ जब सीएम, सिंधिया, स्पीकर ने इसका वर्चुअली लोकार्पण कर दिया और इस मुद्दे पर कांग्रेस को अपना आंदोलन का कॉल वापस लेना पड़ा। इस तरह कांग्रेस के हाथ से जनभावनाओं से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा खिसक गया।
