पिछले 10 वर्षाें में 52.37 करोड़ खातों के माध्यम से 33.65 लाख करोड़ के मुद्रा ऋण

नयी दिल्ली 08 अप्रैल (वार्ता) प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के प्रति छोटे और लघु उद्यमियों का विश्वास बढ़ा है जिससे पिछले 10 वर्षाें में 52.37 करोड़ खातों के माध्यम से 33.65 लाख करोड़ रुपये से अधिक के मुद्रा ऋण दिये गये है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 8 अप्रैल 2015 को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) का शुभारंभ किया था। मुद्रा योजना वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गैर-कॉर्पोरेट और गैर-कृषि आय अर्जित करने वाली गतिविधियों के लिए आसानी से और बिना किसी जमानत के 20 लाख रुपये तक का ऋण प्रदान करती है। पहले यह ऋण सीमा 10 लाख रुपये थी जिसको 24 अक्टूबर 2024 को बढ़कार 20 लाख रुपये कर दी गयी। ये ऋण बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं (एनबीएफसी), एमएफआई और अन्य वित्तीय संस्थानों के माध्यम से दिए जाते हैं।
इसके अंतर्गत तरुण प्लस के नाम से नई ऋण श्रेणी की घोषणा की गई है जो विशेष रूप से उन लोगों के लिए डिज़ाइन की गई है जिन्होंने पहले तरुण श्रेणी के तहत ऋण लिया है और उसे सफलतापूर्वक चुका दिया है। इससे उन्हें 10 लाख रुपये से 20 लाख रुपये के बीच फंडिंग प्राप्त करने की अनुमति मिलती है। इसके अतिरिक्त, माइक्रो यूनिट्स के लिए क्रेडिट गारंटी फंड (सीजीएफएमयू) अब इन बढ़े हुए ऋणों के लिए गारंटी कवरेज प्रदान करेगा। यह भारत में उद्यमशीलता के लिए तंत्र को पोषित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।
बड़े उद्योगों के पूरक के तौर पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) सहायक इकाइयों के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और देश के समावेशी औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ये उद्यम अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति का लगातार विस्तार कर रहे हैं और घरेलू तथा अंतर्राष्ट्रीय बाजार की मांगों को पूरा करने के लिए उत्पादों और सेवाओं की विविधतापूर्ण श्रृंखला प्रस्तुत कर रहे हैं। मुद्रा योजना एक उल्लेखनीय सरकारी पहल है जो एमएसएमई को ऋण प्राप्त करने में सहयोग करती है। इसे “गैर-वित्तपोषित के वित्तपोषण” के लिए समर्पित योजना के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) की सफलता के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कहा, “ इसका उद्देश्य परिश्रमी सूक्ष्म उद्यमों और पहली पीढ़ी के उद्यमियों को सशक्त बनाना है। प्रधानमंत्री के ‘गैर-वित्तपोषितों को वित्तपोषित करने’ के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर इस योजना के माध्यम से समय पर और किफायती वित्तपोषण में अंतर को पाटने के लिए उन छोटे उद्यमों को बिना किसी जमानत के ऋण प्रदान किए गए जिन्हें औपचारिक संस्थागत ऋण लेने में महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ता था।”
वित्त मंत्री ने लाखों लोगों को सशक्त बनाने और समावेशी विकास के सपने को पूरा करने में पीएमएमवाई की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 52 करोड़ से अधिक मुद्रा ऋण खातों के लिए 33.65 लाख करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति के साथ यह योजना करोड़ों उद्यमियों, विशेष रूप से समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्गों की आकांक्षाओं को पंख लगाने में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई है। इसके अंतर्गत 2015 से, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों से संबंधित विभिन्न हाशिए के समुदायों को 11.58 लाख करोड़ रुपये के मुद्रा ऋण स्वीकृत किए गए हैं। इसके जरिए प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र को वास्तविकता में अमल में लाया गया है।
श्रीमती सीतारमण ने महिला उद्यमिता और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने वाली इस योजना के प्रभाव की सराहना करते हुए कहा “यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि कुल मुद्रा ऋण खातों में से लगभग 68 प्रतिशत महिलाओं को स्वीकृत किए गए हैं, जो महिलाओं को राष्ट्रीय आर्थिक विकास में सशक्त बनाने और सक्षम बनाने का एक साधन बन गया है और महिला उद्यमियों की अगली पीढ़ी को प्रेरित कर रहा है। 2024-25 की बजट घोषणा के अनुरूप, पिछले वर्ष तरुण-प्लस श्रेणी की शुरूआत की गई जिसमें ऋण सीमा बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है। इससे सफल उद्यमियों को अपने कार्य का विस्तार करने और अपनी पूरी क्षमता को उजागर करने में मदद मिलेगी।”
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि पीएमएमवाई न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी ऐसी सबसे महत्वपूर्ण पहलों में से एक है, जिसका उद्देश्य उद्यमिता को बढ़ावा देना है। वित्तीय समावेशन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है, क्योंकि यह समावेशी विकास को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पीएमएमवाई छोटे उद्यमियों को बैंकों, एनबीएफसी और एमएफआई से ऋण सहायता प्राप्त करने के लिए मंच प्रदान करता है। उन्होंने बताया “ योजना की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि भारत के छोटे उद्यमियों को समर्थन देना भारतीय अर्थव्यवस्था को फलने-फूलने और समृद्ध बनाने में मदद करने के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है।” उन्होंने कहा कि इस योजना ने बड़ी संख्या में उद्यमियों को महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान की है, जिससे उन्हें अपना व्यवसाय स्थापित करने और संचालित करने में मदद मिली है और उनमें आर्थिक सुरक्षा की भावना पैदा हुई है। इसने देश भर में विशेष रूप से अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग (ऋण लाभार्थियों का 50 प्रतिशत) और महिलाओं (ऋण लाभार्थियों का 68 प्रतिशत) सहित समाज के हाशिए पर पड़े वर्गों के लिए स्वरोजगार के अवसर पैदा किए हैं।
मुद्रा ऋण अब चार श्रेणियों में प्रदान किए जा रहे हैं जिनमें ‘शिशु’, ‘किशोर’, ‘तरुण’ और नई जोड़ी गई श्रेणी ‘तरुण प्लस’, जो उधार लेने वालों की स्थिति में वृद्धि या विकास के चरण और वित्तपोषण की उनकी आवश्यकताओं को दर्शाती है। ये ऋण विनिर्माण, व्यापार और सेवा क्षेत्रों में सावधिक वित्तपोषण और कार्यशील पूंजी की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं, जिसमें मुर्गीपालन, डेयरी और मधुमक्खीपालन आदि जैसी कृषि से संबंधित गतिविधियां शामिल हैं। इसकी ब्याज दर भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों से नियंत्रित होती है, जिसमें कार्यशील पूंजी सुविधाओं के लिए लचीली पुनर्भुगतान शर्तें शामिल हैं।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 21 मार्च 2025 तक की उपलब्धियों में महिलाओं को शिशु श्रेणी के अंतर्गत कुल 8.49 लाख करोड़ रुपये, किशोर श्रेणी के अंतर्गत 4.90 लाख करोड़ रुपये तथा तरुण श्रेणी के अंतर्गत 85 करोड़ रुपये ऋण वितरित किए गए। अल्पसंख्यक वर्ग को शिशु के तहत 1.25 लाख करोड़ रुपये, किशोर के तहत 1.32 लाख करोड़ रुपये और तरुण के तहत 50 करोड़ रुपये दिए गए। नये उद्यमी के तहत शिशु श्रेणी में 8.21 करोड़ खाते जिनमें स्वीकृत राशि 2.24 लाख करोड़ रुपये तथा वितरित राशि 2.20 लाख करोड़ रुपये है। किशोर श्रेणी में 2.05 करोड़ खाते जिनमें रुपये 4.09 लाख करोड़ स्वीकृत और रुपये 3.89 लाख करोड़ भुगतान किए गए। तरुण श्रेणी में 45 लाख खाते जिनमें स्वीकृत राशि 3.96 लाख करोड़ रुपये तथा वितरित राशि 3.83 लाख करोड़ रुपये।

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