
सीधी: जिले में धान उपार्जन केंद्रों के संचालन से संबंधित प्रक्रियाओं पर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, कुछ ऐसे समूह, जिनके उपार्जन कार्य में पूर्व में अनियमितताएँ पाई गई थीं, अब दूसरे समूहों के नाम से उपार्जन केंद्रों के लिए आवेदन कर रहे हैं।जिले में प्रारंभिक चरण में 39 उपार्जन केंद्र स्थापित किए गए थे, और कुछ क्षेत्रों में अतिरिक्त केंद्र स्थापित करने की प्रक्रिया भी जारी है। पिछले वर्ष की जांच के दौरान कुछ समूहों द्वारा संचालित उपार्जन केंद्रों में धान की मात्रा में अंतर दर्ज किया गया था, जिसके बाद संबंधित समूहों से वसूली तथा कंप्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश जारी किए गए थे।
समूहों के सत्यापन की मांग
स्थानीय स्तर पर यह सुझाव दिया जा रहा है कि उपार्जन केंद्रों की जिम्मेदारी सौंपने से पूर्व संबंधित समूहों का विस्तृत सत्यापन किया जाए। अधिकारियों का मानना है कि यदि किसी समूह के विरुद्ध पहले अनियमितताओं के मामले दर्ज हुए हों, तो नए नाम से आवेदन करने की स्थिति में भी उनके दस्तावेज़ और कार्यप्रणाली की गहन जांच आवश्यक है।
कंप्यूटर प्रविष्टियों की भूमिका
उपार्जन केंद्रों में धान खरीदी से संबंधित सभी प्रविष्टियाँ कंप्यूटर ऑपरेटरों द्वारा की जाती हैं। गलत प्रविष्टियों की संभावना को देखते हुए इस प्रक्रिया की निगरानी और तकनीकी जांच की आवश्यकता भी सामने आई है, ताकि जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक भेजे जाने वाले आंकड़े वास्तविकता के अनुरूप हों।
टीकटकला और चुरहट के पूर्व अनुभव
पिछले वर्ष टीकटकला और चुरहट उपार्जन केंद्रों के संचालन के दौरान कुछ समूहों के कार्यों की जांच में अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था। अब यह चर्चा है कि ऐसे समूह नए तरीकों से पुनः आवेदन कर रहे हैं, जिन पर प्रशासन सतर्कता बरत रहा है।
इनका कहना है
जिन समूहों के कार्यों में पूर्व में अनियमितताएँ दर्ज की गई हैं, उन्हें उपार्जन केंद्रों की जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। यदि कोई समूह नए नाम से आवेदन करता है, तो निरीक्षण के दौरान इसकी जांच की जाएगी। उपार्जन केंद्रों के संचालन हेतु समूहों से डीडी जमा कराने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
प्रियल यादव, डिप्टी कलेक्टर एवं प्रभारी जिला आपूर्ति अधिकारी, सीधी
