नयी दिल्ली, 07 अप्रैल (वार्ता) भारतीय पेंशनर्स मंच ने वित्त विधेयक में पूर्व और नवीन पेंशनर्स के बीच सेवानिवृत्ति की तिथि के आधार पर अंतर कर सकने वाले प्रावधान को भेदभाव उत्पन्न करने वाला करार देते हुये कहा है कि यह उच्चतम न्यायालय के फैसले के विरुद्ध भी है।
मंच के संस्थापक एवं अध्यक्ष वी एस यादव ने यहां एक बयान में कहा कि उन्होंने इस विसंगति की तरफ ध्यान आकृष्ट कराने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि यह डी एस नकारा बनाम भारत सरकार के वर्ष 1982 में दिये गये उच्चतम न्यायालय के फैसले के भी विरुद्ध है।
श्री यादव ने पत्र में कहा है कि यह स्पष्ट किया जाए कि यह वैधता प्रावधान केवल छठे वेतन आयोग तक सीमित है और
सातवें वेतन आयोग के तहत प्राप्त पेंशन समानता पर इसका कोई प्रभाव न हो। भविष्य में भी पेंशनर्स के बीच भेदभाव न किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दिए गए स्पष्टीकरणों को अधिसूचना के साथ जोड़कर जारी किया जाए। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि यह कदम करोड़ों पेंशनधारकों में असंतोष उत्पन्न कर रहा है। सरकार से अपेक्षा की गयी है कि वह न्याय और समानता के सिद्धांतों के अनुरूप कार्यवाही करेगी।
