अमेरिकी नागरिकों से टेक सपोर्ट धोखाधड़ी का मुख्य आरोपी गिरफ्तार

नयी दिल्ली, 24 दिसंबर (वार्ता) दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में अवैध कॉल सेंटर के माध्यम से अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने वाले चंद्र प्रकाश गुप्ता को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को गिरफ्तार किया है। राजधानी क्षेत्र में तकनीकी सहयोग से यह घोटाला बड़े पैमाने पर संचालित हो रहा था।

अधिकारियों ने बताया कि टेक सपोर्ट धोखाधड़ी में मुख्य आरोपी चंद्र प्रकाश गुप्ता जुलाई 2024 से सीबीआई की छापेमारी के बाद फरार चल रहा था, जिसके बाद उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। वह तकनीकी सेवा प्रदाताओं का प्रतिरूपण करके धोखाधड़ी करता था।

ईडी ने अपनी जांच दिल्ली में सीबीआई, आईओडी द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी, जिसमें भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट के तहत मामले दर्ज किए गए थे। ईडी ने 19 और 20 दिसंबर 2025 को दिल्ली-एनसीआर में घोटाले के मास्टरमाइंड और उनके सहयोगियों से जुड़े 10 स्थानों पर तलाशी ली।

इन तलाशियों में लगभग 1.75 करोड़ रुपये की ज्वेलरी, 10 लाख रुपये से अधिक नकद, चार हाई-एंड वाहन, आठ लग्जरी घड़ियां, डिजिटल डिवाइस और आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए। हालांकि, मुख्य आरोपी अर्जुन गुलाटी, अभिनव कालरा और दिव्यांश गोयल अभी भी फरार हैं।

तलाशी के दौरान कई परिसरों से आवासीय सीमा से कहीं अधिक महंगी शराब की 220 से अधिक बोतलें बरामद हुईं। इस मामले को राज्य आबकारी विभाग को रिपोर्ट किया गया और कानून के अनुसार एफआईआर दर्ज की गई।

अब तक की जांच से पता चला है कि नोएडा और गुरुग्राम से अवैध कॉल सेंटर संचालित किए जा रहे थे, जहां कर्मचारी अमेरिकी नागरिकों को ठगते थे। धोखाधड़ी की गतिविधियां धोखेबाज पॉप-अप अलर्ट संदेशों के माध्यम से की जाती थीं, जो आधिकारिक माइक्रोसॉफ्ट सिक्योरिटी नोटिफिकेशन की तरह दिखते थे।

ये पॉप-अप पीड़ितों को स्क्रीन पर दिखाए गए फोन नंबर पर कॉल करने के लिए गुमराह करते थे, जहां वे आरोपी व्यक्ति द्वारा संचालित अवैध कॉल सेंटर से जुड़ जाते थे।

आरोपी पीड़ितों को टीमव्यूअर या एनीडेस्क जैसे रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने के लिए राजी करते थे, जिससे उनके कंप्यूटर सिस्टम पर पूरा नियंत्रण प्राप्त हो जाता था। एक्सेस मिलने के बाद, आरोपी पीड़ितों के डिवाइस पर नेविगेट करते और संवेदनशील व्यक्तिगत एवं वित्तीय जानकारी, जिसमें ऑनलाइन बैंकिंग विवरण शामिल हैं, निकाल लेते थे।

आरोपी उन्हें व्यक्तिगत बैंक खातों से फंड ट्रांसफर करने के लिए प्रेरित करते थे, जो वायर ट्रांसफर के माध्यम से फेडरल रिजर्व द्वारा नियंत्रित बताए गए खातों में जाते थे, यह बहाना बनाकर कि फंड को आसन्न हैकिंग खतरे से बचाया जा रहा है।

अपराध की आय को हांगकांग में बैंक खातों में वायर ट्रांसफर किया जाता था, क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था और बाद में फिएट मुद्रा में लिक्विडेट किया जाता था। ये फंड विभिन्न ऑपरेटरों की मदद से कई शेल इकाइयों के माध्यम से आरोपी और उनकी कंपनियों के खातों में वापस लेयर किए जाते थे।

अब तक की जांच से पता चलता है कि नवंबर 2022 से अप्रैल 2024 के बीच आरोपी व्यक्तियों ने पीड़ितों से लगभग 1.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर ठगे। इसके अलावा, अपराध की आय से घोटाले के मास्टरमाइंड द्वारा खरीदी गई 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां चिह्नित की गई हैं।

2025 में पहले की गई तलाशियों में भी आपत्तिजनक सामग्री, लग्जरी संपत्तियां और उच्च मूल्य की अचल संपत्तियों में निवेश के विवरण जब्त किए गए थे। इस मामले में आगे की जांच जारी है।

 

 

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