रायपुर 07 अप्रैल (वार्ता) छत्तीसगढ़ सरकार ने बजट में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) की तर्ज पर स्पेशल ऑपरेटिंग ग्रुप (एसओजी) का गठन करने समेत तीन नए सुरक्षा बलों के गठन की घोषणा की है।
आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे इस कदम से न केवल राज्य की सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होगी, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे। सरकार ने इन बलों में भर्ती के लिए स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने का भी वादा किया है।
सरकार ने एनएसजी की तर्ज पर एसओजी का गठन करने की योजना बनाई है। पहले चरण में 44 पदों की स्वीकृति मिली है। एसओजी के जवानों को एनएसजी के अधिकारियों द्वारा विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे वे आंतरिक अशांति, हमलों और महत्वपूर्ण लोगों की सुरक्षा जैसे कार्यों में सक्षम हो सकें। भविष्य में इन पदों की संख्या बढ़ाकर 100 तक की जाएगी।
बस्तर क्षेत्र के युवाओं के लिए 3200 पदों पर भर्ती की जाएगी। ये पद बस्तर, दंतेवाड़ा, कोंडागांव, बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा और कांकेर जिलों में हैं। पिछले साल भी बस्तर फाइटर्स की 3100 पदों पर भर्ती की गई थी और इस बार भी बस्तर संभाग के स्थानीय युवाओं को इसमें शामिल होने का अवसर मिलेगा।
राज्य में भारतीय रिजर्व बटालियन (आईआरबीएन) का गठन किया जा रहा है, जिसमें 1007 पदों पर भर्ती की जाएगी। यह बटालियन कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा के लिए काम करेगी और इसके जवानों को उग्रवाद विरोधी कार्यों के लिए विशेष प्रशिक्षण मिलेगा।
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की तर्ज पर राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल (एसआईएसएफ) का गठन किया जा रहा है, जिसमें 500 पदों पर भर्ती होगी। यह बल राज्य के महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों और खदानों की सुरक्षा के लिए काम करेगा और आपदा प्रबंधन, वीआईपी सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा में मदद करेगा।
राज्य में स्पेशल फोर्स के गठन के साथ बड़ी संख्या में भर्ती की जाएगी। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार का बड़ा अवसर मिलेगा। पुलिस विभाग में भी वर्तमान में भर्ती प्रक्रिया चल रही है, जो युवाओं के लिए एक और मौका है।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, जिनके पास गृह विभाग का भी प्रभार है, ने इस योजना को लेकर उम्मीद जताई कि इस कदम से राज्य की आंतरिक सुरक्षा में सुधार होगा और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
गौरतलब है कि बस्तर संभाग अब भी नक्सलवाद की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। नये सुरक्षा बलों के गठन से उग्रवाद को काबू करने में शासन-प्रशासन को मदद ही मिलेगी।
