कनिगिरी (आंध्र प्रदेश), (वार्ता) देश की सबसे बड़ी निजी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने आंध्र प्रदेश में 500 सीबीजी संयंत्रों में से पहले की बुधवार को आधारशिला रखी। कंपनी की प्रदेश में एकीकृत सीबीजी हब विकसित करने में 65,000 करोड़ रुपये निवेश करने की योजना है।
आंध्र प्रदेश के आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री, रोजगार सृजन पर मंत्रियों के समूह के अध्यक्ष नारा लोकेश ने आज आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले के कनिगिरी में पहले रिलायंस कम्प्रेस्ड बायो-गैस (सीबीजी) संयंत्र की आधारशिला रखी।
यह परियोजना 139 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश के साथ विकसित की जा रही है और यह एपी के लिए 65,000 करोड़ रुपये के कुल पूंजी परिव्यय वाली 500 परियोजनाओं की श्रृंखला में पहली है। इस प्लांट को अभिनव तकनीक के साथ विकसित किया जाएगा और इसमें नेपियर घास का उपयोग किया जाएगा जिसे बायो-गैस का उत्पादन करने के लिए बंजर और बेकार जमीनों पर उगाया जाएगा। इस परियोजना के परिणामस्वरूप किसानों को पट्टे के राजस्व के भुगतान के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण आजीविका मिलेगी, और इसके अतिरिक्त, किसानों द्वारा उगाई गई घास के लिए एक निश्चित मूल्य भी मिलेगा।
इस मौके पर श्री लोकेश ने कहा,“मुझे खुशी है कि हम रिकॉर्ड समय में अपेक्षित सहायता प्रदान करने में सक्षम हैं और रिलायंस को प्रकाशम जिले में इस परिवर्तनकारी सीबीजी परियोजना पर काम शुरू करने में सक्षम बनाया है। यह कई परियोजनाओं में से पहली है और हमारा लक्ष्य है कि रिलायंस आंध्र प्रदेश में 65,000 करोड़ रुपये के कुल निवेश के साथ 500 ऐसी परियोजनाएँ विकसित करेगा। पिछले कुछ दशकों में रिलायंस इंडस्ट्रीज एपी के सबसे बड़े और सबसे भरोसेमंद निवेशकों में से एक रही है और हम इस साझेदारी को सीबीजी क्षेत्र में विस्तारित करने के लिए उत्साहित हैं।”
रिलायंस ने आंध्र प्रदेश में एकीकृत सीबीजी हब स्थापित करने के लिए एक साहसिक यात्रा शुरू की है। प्रकाशम, अनंतपुर, चित्तूर और कडप्पा में लगभग 500,000 एकड़ बंजर और बेकार जमीन का उपयोग इस उद्देश्य के लिए किया जाएगा। एक बार जब सभी प्लांट पूरी तरह से चालू हो जाएंगे, तो वे सालाना 40 लाख टन हरित, स्वच्छ सीबीजी और 11 लाख टन जैविक उर्वरक का उत्पादन करेंगे। इस पहल से ग्रामीण युवाओं के लिए 250,000 नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।
रिलायंस के कार्यकारी निदेशक पी एम एस प्रसाद ने इस अवसर पर कहा,“हम इस परियोजना को ऊर्जा उत्पादन से कहीं बढ़कर मानते हैं। यह समुदायों का उत्थान करेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा। और यह आंध्र प्रदेश की स्वच्छ ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाएगा। हमारी पहल हमारे अन्नदाताओं को ऊर्जादाता बनने के लिए आवश्यक उपकरण और तकनीक से लैस करेगी। इसके अतिरिक्त, इन संयंत्रों से उपोत्पाद एक करोड़ टन किण्वित जैविक खाद देगा, जिससे किसानों को रासायनिक उर्वरकों की खपत में कमी लाने में मदद मिलेगी। इससे 15 लाख एकड़ बंजर भूमि उपजाऊ कृषि भूमि में बदल जाएगी, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी। हम (राज्य सरकार और रिलायंस) एक संयुक्त दृष्टिकोण साझा करते हैं। एक ऐसा दृष्टिकोण जिसमें आंध्र प्रदेश भारत के अग्रणी राज्य के रूप में चमकता है। यह जैव ऊर्जा परियोजना उस दिशा में एक बड़ा कदम है, और हम इसे वास्तविकता बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। साथ मिलकर, हम कचरे को हरित संपदा, ऊर्जा को सशक्तीकरण और भूमि को आजीविका में बदल देंगे।”
