सियासत
कांग्रेस के सर्वोच्च नेता राहुल गांधी संगठन को मैदानी और मजबूत बनाने के लिए जिला अध्यक्षों के अधिकारों में बढ़ोतरी करने जा रहे हैं. सूत्रों के अनुसार 2022 के उदयपुर अधिवेशन में कांग्रेस इस संबंध में फार्मूला तय कर चुकी है. उदयपुर अधिवेशन के निर्णयों के आधार पर अहमदाबाद में 8, 9 अप्रैल को होने वाली कांग्रेस की अखिल भारतीय कमेटी की बैठक में फैसले लिए जाएंगे. इधर, मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी भी जिला अध्यक्षों में बदलाव की तैयारी कर रही है ताकि राहुल गांधी की मंशा के अनुरूप मध्य प्रदेश कांग्रेस संगठन को ढाला जा सके.
हालांकि जीतू पटवारी के नजदीकी लोगों का कहना है कि प्रदेश के जिला अध्यक्षों में बदलाव की शुरुआत 14 अप्रैल के बाद होगी. सूत्रों का कहना है कि इसके दो कारण है, पहला कारण तो यह है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी बड़े फैसले खरमास की समाप्ति के बाद लेना चाहते हैं. खरमास 14 अप्रैल को समाप्त होगा. दूसरी बात यह है कि 14 अप्रैल से पहले कांग्रेस अखिल भारतीय स्तर पर दलितों के लिए कैंपेन लांच करेगी, क्योंकि 14 अप्रैल को भारत रत्न बाबा साहब अंबेडकर की जयंती है. इसके अलावा 3 अप्रैल को कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की बैठक दिल्ली में हो रही है.
जाहिर है प्रदेश संगठन में बदलाव का दौर उसी के बाद शुरु होगा. सूत्रों का यह भी कहना है कि प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के चलते जीतू पटवारी स्वतंत्र फैसले नहीं ले पा रहे हैं, क्योंकि हरीश चौधरी प्रदेशाध्यक्ष को फ्री हैंड नहीं देना चाहते. बहरहाल, मध्य प्रदेश कांग्रेस के जिला अध्यक्षों को दिल्ली बुलाया गया है. 3 अप्रैल को कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व बैठक लेगा, जिसमें कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी प्रमुख रूप से मौजूद रहेंगे.
बैठक से पहले मध्य प्रदेश कांग्रेस अपने सभी जिला अध्यक्षों को ट्रेनिंग दे दी है. मीटिंग में क्या बोलना है और क्या नहीं, इसके बारे में उन्हें बता दिया गया है. गुजरात में होने वाले अधिवेशन से पहले दिल्ली में बैठक होगी.बैठक से पहले सभी जिला अध्यक्षों को ट्रेंड कर दिया गया है. जिला अध्यक्षों की वर्चुअली ली गई बैठक में उन्हें बताया गया कि जो कुछ बोलना वह सोच समझ कर बोलना, साथ ही यदि किसी से पूछा जाए कि मध्य प्रदेश कांग्रेस संगठन में कितने ब्लॉक हैं, तो एक हजार मत बता देना.
जिला अध्यक्षों को यह बताया गया कि किस तरह से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के सवालों का जवाब देना है. उन्हें यह भी कहा गया कि अपने जिले की हर जानकारी से अपडेट रहें, जिसमें कितने विधायक कांग्रेस के, कितने विधायक भाजपा के. ओबीसी की कितनी संख्या, अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति की संख्या कितनी है, कितने अल्पसंख्यक हैं. इसके साथ ही वहां पर कांग्रेस की पूर्व में क्या स्थिति रही और वर्तमान में कांग्रेस की यहां पर क्या-क्या संभावनाएं हैं.
साथ ही कांग्रेस के विधायक संगठन के कार्यक्रम में कितने सक्रिय रहते हैं. इसके अलावा संगठन के पदाधिकारियों की क्या भूमिका होनी चाहिए, ताकि पार्टी उनके क्षेत्र में चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर सके. ऐसे तमाम बिंदुओं पर सभी जिला अध्यक्षों को अपडेट रहने के निर्देश दिए गए हैं. दरअसल, इन दिनों राहुल गांधी, खडगे सहित कांग्रेस के अन्य नेता सभी राज्यों के जिला कांग्रेस के अध्यक्षों से चर्चा कर रहे हैं. जिसमें वे 750 जिला अध्यक्षों से बातचीत कर रहे हैं. इसमें कुछ जिलों के अध्यक्षों से वे बैठक कर चुके हैं, जबकि मध्य प्रदेश के जिला अध्यक्षों से तीन अप्रैल को बैठक करेंगे.
