कहीं फुटेज धुंधले तो कहीं कैमरे बंद, ट्रैफिक कार्रवाई पर भी असर
जबलपुर: पुलिस की तीसरी आंख कहे जाने वाले सीसीटीव्ही कैमरे धोखा देने लगे है। अपराधियों की शिनाख्तगी में अहम रोल निभाने वाले सीसीटीव्ही कैमरे कई स्थानों पर या तो ठप्प पड़े है या उनके फुटेज धुंधले आ रहे है। कैमरों की सुधार की ओर न तो ठेका कंपनी ध्यान देती है और नहीं अफसर इस ओर ध्यान दे रहे है। जिसके चलते कई मामलो में अपराधी तक पहुंचना पुलिस के लिए चुनौती बन जाता है। सीसीटीव्ही कैमरों से होने वाली ट्रैफिक कार्रवाई भी ठप्प हो जाती है.
627 कैमरों से होती है निगरानी
शहर में 627 कैमरों से निगरानी होती है। हर दिन 10 से 20 प्रतिशत कैमरे ठप्प हो जाते है। तकनीकी खराबी आने से कैमरे बंद हो जाते है ऐसे में बंद पड़े क्षेत्र में अपराध हो जाए तो आरोपी की शिनाख्ती में पुलिस को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
नई लोकेशन की गई चिन्हित
जिले में सीसीटीवी कैमरों की संख्या में और इजाफा किया जाना है। इसके अलावा कई ऐसे भी इलाके है जहां रात में सडक़ेे सूनी हो जाती है वहां कैमरे नहीं लगे है। इसके अलावा कुछ नए लोकेशन भी चिन्हित किए गए जहां पर भी हाईटेक कैमरे लगाने की तैयारी की जा रही है। वहीं जहां महिलाओं संबंधित अपराध बढ़े है या जिन लोकेशन से महिलाओं को अधिक आवागमन होता है एवं जहां महिलाओं की संख्या अधिक है वहां भी कैमरे लगाने की तैयारी की जा रही है।
इनका कहना है
फुटेज धंधुले नहीं आ रहे है लैस एक सीमा तक काम करते है अगर दूर की चीज है तो वह फोकस नहीं करते है जैसे मनुष्य की आंख होती है वैसे ही कैमरे होते है।
अरूण दीक्षित, रेडियो प्रभारी,
