आईआईएम इंदौर ने मनाया अपना 26वां वार्षिक दीक्षांत समारोह
इंदौर: भारतीय प्रबंध संस्थान इंदौर (आईआईएम इंदौर) ने आज अपने 26वें वार्षिक दीक्षांत समारोह का आयोजन किया, जिसमें संस्थान के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की उत्कृष्ट उपलब्धियों का उत्सव मनाया गया. इस वर्ष, सैट प्रमुख कार्यक्रर्मों के 788 विद्यार्थियों को डिग्रियाँ प्रदान की गईं. इस अवसर परचेस ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे.आईआईएम इंदौर के 26वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद ने छात्रों को सफलता, असफलता और सीखने की प्रक्रिया के महत्वपूर्ण पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सच्ची प्रतिभा केवल ज्ञान अर्जित करने में नहीं, बल्कि उसे समय-समय पर पुनः परखने, नए दृष्टिकोण अपनाने और कभी- कभी पुरानी सीख को छोड़ने में भी होती है. उन्होंने कहा कि हम सभी अपने जीवन और करियर के लिए विस्तृत योजनाएँ बनाते हैं, खुद को उनके लिए तैयार करते हैं, लेकिन कई बार वे योजनाएँ वास्तविकता में लागू ही नहीं होतीं. इसलिए, सफलता केवल योजना बनाने में नहीं, बल्कि बदलते हालात के अनुसार खुद को ढालने में भी है.
उन्होंने बताया कि असफलता जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है, और हर असफलता से सीखकर हम अपने अगले कदम को और बेहतर बना सकते हैं। ठीक वैसे ही जैसे शतरंज में एक चाल पूरा खेल बदल सकती है, वैसे ही जीवन में सही समय पर सही निर्णय लेने से भविष्य उज्जवल बन सकता है. अपने प्रेरणादायक संदेश में श्री आनंद ने छात्रों को यह सीख दी कि सफलता केवल एक निश्चित योजना का पालन करने में नहीं, बल्कि नई परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने, हर अनुभव से सीखने और अपने सफर का आनंद लेने में है.
सीखने की प्रक्रिया समाप्त नहीं होती
भारतीय प्रबंध संस्थान इंदौर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष, एम एम मुरुगप्पन ने कहा आपके निर्णय केवल आपकी सफलता को नहीं, बल्कि दीर्घकालिक संस्थानों को भी आकार देंगे. अपनी शिक्षा, नेतृत्व कौशल और मूल्यों का उपयोग भारत और दुनिया के लिए सार्थक परिवर्तन लाने के लिए करें. कक्षा से बाहर असली परीक्षा यह होगी कि आप अपने ज्ञान का उपयोग कैसे करते हैं और अपने कार्यों से क्या प्रभाव उत्पन्न करते हैं. सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती-इसे जारी रखें और दुनिया में बदलाव लाने का प्रयास करें.
प्रयासों में अडिग रहेंः प्रो.रॉय
दीक्षांत समारोह में, आईआईएम इंदौर के निदेशक प्रो. हिमांशु राय ने ग्लोब – एक मूल्य-आधारित शब्दों कि संचरना के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रेरित किया. उन्होंने इस पर प्रकाश डाला कि सफलता केवल एक लक्ष्य तक पहुँचने के बारे में नहीं है, बल्कि एक ऐसा सेतु निर्मित करने के बारे में है जो न केवल स्वयं को बल्कि दूसरों को भी आगे बढ़ने में मदद करे. उन्होंने कहा, दुनिया आपको केवल आपकी उपलब्धियों के लिए नहीं, बल्कि आपके द्वारा अपनाए गए मूल्यों और आपके द्वारा किए गए प्रभाव के लिए पहचानेगी. उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने प्रयासों में निडर रहें, अपने दृष्टिकोण में अनुकूलनशील रहें और समाज में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध रहें
